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Tj Vision Media 11 months ago
बच्चों में सार्कोमा के बढ़ते मामलों पर वैश्विक विशेषज्ञों की चिंता; समय पर निदान और सही सर्जरी से बढ़ सकती है 70% तक जीवित रहने की दर

ग्लोबल हेल्थकेयर अकादमी की दो-दिवसीय इंडो–इटालियन कंसेंसस मीट में भारत, इटली, मलेशिया और सिंगापुर के विशेषज्ञ शामिल

बेंगलुरु, 6 दिसंबर:
बच्चों में सार्कोमा देर से पहचाने जाने और गलत निदान के मामलों में बढ़ोतरी को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने समय पर एमआरआई, सही बायोप्सी और प्रथम चरण में सटीक सर्जरी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। ग्लोबल हेल्थकेयर अकादमी द्वारा आयोजित दो-दिवसीय इंडो–इटालियन कंसेंसस मीट में चार देशों के 200 से अधिक विशेषज्ञों ने सार्कोमा उपचार, 3डी प्रिंटिंग, उन्नत पुनर्निर्माण तकनीकों और बहुविषयक देखभाल पर विस्तृत चर्चा की।


एचसीजी एंटरप्राइजेज के संस्थापक डॉ. बी.एस. अजय कुमार ने कहा कि “सार्कोमा का शुरुआती चरण में सही उपचार मिलने पर यह पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है। राष्ट्रीय सार्कोमा रजिस्ट्र्री और त्वरित एमआरआई उपलब्धता अब समय की आवश्यकता है।”

एचसीजी कैंसर अस्पताल के डॉ. प्रमोद एस. चिंदर, जिन्होंने 6,000 से अधिक बोन ट्यूमर मामलों का उपचार किया है, ने बताया कि गलत सर्जरी के कारण बच्चों को अंग गंवाने की स्थिति भी बन जाती है। उन्होंने कहा कि 3डी-प्रिंटेड इम्प्लांट, रोबोटिक नेविगेशन और टार्गेटेड कीमोथेरेपी जैसी तकनीकें भारत में अंग-संरक्षण सर्जरी को नई दिशा दे रही हैं।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि लगातार हड्डी का दर्द, सूजन, रात में बढ़ने वाला दर्द या छोटे झटकों पर हड्डी टूटना—इन संकेतों को सामान्य चोट समझकर नज़रअंदाज़ करना देर से निदान का प्रमुख कारण है। एविडेंस के अनुसार, एविंग सार्कोमा के 68% मामले 0–19 वर्ष के बच्चों में पाए जाते हैं।

विशेषज्ञों ने सार्कोमा उपचार को सरकारी स्वास्थ्य बीमा में शामिल करने, एमआरआई सुविधाएँ बढ़ाने और राष्ट्रीय सार्कोमा रजिस्ट्र्री लागू करने की मांग की।
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