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बाजोरिया पिता-पुत्र के राजनीतिक भविष्य पर सवाल!

बाजोरिया पिता-पुत्र के राजनीतिक भविष्य पर सवाल!

* बेटे विप्लव का हिंगोली-परभणी सीट पर दावा * पिता-पुत्र की दावेदारी से महायुति में फंस सकता है पेंच
अमरावती/दि.22- स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद की सीट के लिए होने जा रहे चुनाव में सबसे दिलचस्प बात अकोला से वास्ता रखनेवाले बाजोरिया पिता-पुत्र की जोडी को लेकर दिखाई दे रही है.

क्योंकि जहां पिता व पूर्व विधायक गोपीकिसन बाजोरिया महायुति के तहत शिंदे सेना की टिकट पर अमरावती की सीट से चुनाव लडने के इच्छुक हैं. वहीं उनके बेटे तथा विधायक विप्लव बाजोरिया महायुति के तहत शिंदे सेना के टिकट पर हिंगोली-परभणी सीट से चुनाव लडने की तैयारी में जुटे हुए है. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अमरावती निकाय क्षेत्र से भाजपा द्वारा तथा हिंगोली-परभणी सीट निकाय क्षेत्र से अजीत पवार गुट वाली राकांपा द्वारा अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतारते हुए चुनाव लडने की तैयारी की जा रही है. जिससे बाजोरिया पिता-पुत्र के राजनीतिक भविष्य पर फिलहाल सवालिया निशान लगते नजर आ रहे हैं.
बता दें कि शिवसेना से वास्ता रखनेवाले पूर्व विधायक गोपीकिसन बाजोरिया ने इससे पहले लगातार तीन बार अकोला-वाशिम-बुलढाणा स्वायत्त निकाय क्षेत्र का विधान परिषद में प्रतिनिधित्व किया है. तीनों बार वे तत्कालीन भाजपा-शिवसेना युति के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीते. लेकिन युति टूटने के बाद पिछली बार भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ शिवसेना की ओर से चुनाव लडते हुए उन्हें हार का सामना करना पडा. जिसके बाद उन्होंने वर्ष 2022 में शिवसेना उबाठा का दामन छोडते हुए शिंदे गुटवाली शिवसेना में प्रवेश कर लिया था. हालांकि शिंदे गुटवाली शिवसेना में उनके नेतृत्व को लेकर अकोला के शहर व जिला पदाधिकारियों ने काफी हद तक असंतोष वाला माहौल ही दिखाई देता रहा. संभवत: इसी वजह के चलते पूर्व विधायक गोपीकिसन बाजोरिया अब अपने लिए नई राजनीतिक जमीन की तलाश कर रहे हैं. जिसके तहत उन्होंने विधान परिषद की अमरावती सीट से चुनाव लडने हेतु शिंदे सेना के समक्ष अपनी दावेदारी पेश की है. साथ ही विगत दिनों अमरावती का दौरा करते हुए यहां पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं व पदाधिकारियों से भी मुलाकात व बातचीत की है. जिसमें पूर्व विधायक बाजोरिया द्बारा युवा स्वाभिमान पार्टी के नेता व विधायक रवि राणा के साथ की गई मुलाकात सबसे प्रमुख रूप से चर्चा में रही.
वहीं पूर्व विधायक गोपिकिसन बाजोरिया के बेटे विप्लव बाजोरिया भी इससे पहले हिंगोली-परभणी निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के सदस्य रह चुके है. जिन्होेंने वर्ष 2018 में हुए विधान परिषद चुनाव में परभणी-हिंगोली सीट से तत्कालीन एकीकृत शिवसेना प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लडा था और वे इस बार भी परभणी-हिंगोली सीट से चुनाव लडने की तैयारी में हैं. जिन्हें शिंदेगुटवाली शिवसेना के पार्टी प्रमुख व उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्बारा परभणी-हिंगोली सीट के लिए हरी झंडी दिए जाने की भी जानकारी हें. परंतु पिछली बार की तरह ही इस बार भी परभणी-हिंगोली सीट पर विप्लव बाजोरिया को बाहरी उम्मीदवार बताते हुए उनकी दावेदारी का विरोध किया जा रहा हैं साथ ही साथ इस बार परभणी-हिंगोली विधान परिषद सीट पर अजीत पवार गुटवाली राकांपा द्बारा दावा किया गया. इसके चलते इस सीट को लेकर महायुति के दो घटक दलों के बीच तकनीकी पेंच फंसा हुआ है.
ऐसे में कहा जा सकता है कि शिवसेना व राकांपा में हुई दोफाड के बाद बाजोरिया पिता-पुत्र के लिए अब राजनीतिक स्थितियां पूरी तरह से उलट गई है. जिसके चलते अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर काफी हद तक अनिश्चितता भी देखी जा रही है.

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