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कानून की किताबें छोड़ीं, लोगों का भविष्य सँवारा: दिनंकर देव परमार की प्रेरणादायक कहानी

वित्तीय जागरूकता केवल आंकड़ों या निवेश योजनाओं तक सीमित नहीं है — यह एक विचार है, एक आंदोलन, जो समाज को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ले जाता है। ऐसे दौर में, जब लोग सुरक्षित नौकरी को प्राथमिकता देते हैं, दिनंकर देव परमार ने जोखिम उठाकर अपने जुनून को अपनाया और न केवल खुद के लिए एक पहचान बनाई, बल्कि दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने का भी जरिया बने।

वे आज प्रमाणित वित्तीय सलाहकार, शिक्षक, समाजसेवी और राष्ट्रीय दिव्य प्रतिभा पुरस्कार से सम्मानित युवा मार्गदर्शक हैं। लेकिन उनकी यात्रा सीधी नहीं थी। वह एक आम शहर के साधारण लड़के से शुरू हुई थी, जिसके पास असाधारण सपने थे — और पिता जैसा एक मजबूत मार्गदर्शक।


बचपन से व्यवहारिक और जिज्ञासु मन

दिनंकर का बचपन ऐसे माहौल में बीता जहाँ संसाधन सीमित थे, लेकिन सोच सीमाओं से परे थी। किताबों के साथ-साथ उन्हें व्यवहारिक चीज़ों में भी दिलचस्पी थी ।छोटी उम्र से ही उन्हें पैसों के पीछे की गणित और बाज़ार की चालों में गहरी रुचि थी।

उनकी जिज्ञासा को आकार देने में एक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई — उनके पिता की। दिनंकर बताते हैं, "मेरे पिता ने मुझे हमेशा सोचने और समझने की आज़ादी दी। जब मैं ट्रेडिंग और शेयर बाज़ार की बातें करता था, तो वे न कभी रोकते थे, न हँसते थे — बल्कि प्रोत्साहित करते थे कि और सीखो, और जानो।"

जल्दी समझ ली भविष्य की दिशा:
शेयर बाज़ार की ओर रुझान स्कूल खत्म होते-होते दिनंकर ने ट्रेडिंग की बुनियादी समझ विकसित कर ली । अन्य छात्र कॉलेज और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त थे, तब दिनंकर बाज़ार के ट्रेंड्स और कंपनियों के प्रदर्शन को समझने में लगे रहते थे।

उनका मानना था कि असली शिक्षा वही है जो जीवन में काम आए — और उन्होंने यही रास्ता अपनाया।

पारंपरिक रास्ता छोड़ा, जुनून को अपनाया
दिनंकर ने शुरुआत में कानून की पढ़ाई शुरू की — एक सुरक्षित और सम्मानित करियर विकल्प। लेकिन कुछ समय बाद ही उन्हें यह एहसास हुआ कि उनकी आत्मा इस क्षेत्र से जुड़ नहीं पा रही है। उन्होंने आत्ममंथन किया और साहसिक निर्णय लिया — कानून कॉलेज छोड़ दिया और पूरी तरह से खुद को वित्तीय दुनिया में समर्पित कर दिया।

यह निर्णय आसान नहीं था, समाज और रिश्तेदारों की अपेक्षाएँ अलग थीं। लेकिन उन्हें अपने पिता का समर्थन मिला, जिन्होंने कहा: "अगर दिल कहता है कि यही सही है, तो पीछे मत देखो। मेहनत करोगे, तो रास्ता खुद बन जाएगा।"

प्रमाणिकता की मुहर:

NISM से प्रोफेशनल ट्रेनिंग
अपनी योग्यता को पेशेवर रूप देने के लिए दिनंकर ने भारत सरकार के National Institute of Securities Markets (NISM) से फाइनेंशियल एडवाइजरी का प्रमाणपत्र हासिल किया।

लोगों को सशक्त बनाने की दिशा में कदम
आज दिनंकर ने सैकड़ों युवाओं और परिवारों को न केवल निवेश करना सिखाया है, बल्कि वित्तीय आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है। उनकी सिखाने की शैली सरल और स्पष्ट है। वे कठिन तकनीकी शब्दों की बजाय स्थानीय भाषा और उदाहरणों का प्रयोग करते हैं।

उनके लिए हर व्यक्ति, चाहे वह गाँव का किसान हो या शहर का युवा — एक संभावित निवेशक है, जिसे सही जानकारी और मार्गदर्शन की जरूरत है।

सामाजिक जिम्मेदारी: शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय योगदान
दिनंकर की सफलता सिर्फ चार्ट्स और शेयरों में नहीं मापी जा सकती — वह मापी जाती है उनके सामाजिक योगदान से। वे गाँवों के पिछड़े तबके के छात्रों के लिए नियमित रूप से किताबें, और करियर मार्गदर्शन उपलब्ध कराते हैं। वे कहते हैं:

"जिस बच्चे के पास अवसर नहीं है, उसकी आँखों में भी सपने हैं — मेरा प्रयास है कि वे सपने अधूरे न रह जाएँ।"

राष्ट्रीय पहचान: दिव्य प्रतिभा पुरस्कार से सम्मानित
उनके काम और समाज के लिए योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता तब मिली जब उन्हें राष्ट्रीय दिव्य प्रतिभा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन व्यक्तियों को दिया जाता है जो अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देते हैं और समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।

भविष्य की योजना: हर शहर तक वित्तीय शिक्षा
दिनंकर का सपना है कि हर गाँव और कस्बे में वित्तीय जागरूकता पहुँचे। वे मानते हैं कि आज का भारत सिर्फ पढ़ा-लिखा नहीं, बल्कि वित्तीय रूप से समझदार भी होना चाहिए।

उनकी दृष्टि साफ़ है — “शिक्षा और निवेश की ताक़त से ही हम गरीबी, बेरोज़गारी और असमानता को जड़ से मिटा सकते हैं।”

एक ऐसी कहानी जो युवा भारत को दिशा देती है

दिनंकर देव परमार की यात्रा हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो अपने जुनून को अपनाना चाहता है लेकिन डरता है कि ‘लोग क्या कहेंगे।’ वे बताते हैं कि जीवन में साहसिक फैसले ही असली बदलाव लाते हैं — और जब उन फैसलों के पीछे सेवा की भावना हो, तो सफलता खुद चलकर आती है।

वे सिर्फ एक वित्तीय सलाहकार नहीं — एक ऐसे शिक्षक हैं जो ज्ञान के साथ मूल्य भी देते हैं, एक ऐसे समाजसेवी हैं जो चुपचाप ज़िंदगियाँ संवार रहे हैं।

लेखक परिचय:
दिनंकर देव परमार एक प्रमाणित वित्तीय सलाहकार, शिक्षक और समाजसेवी हैं। उन्हें राष्ट्रीय दिव्य प्रतिभा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वे ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता, शिक्षा और करियर मार्गदर्शन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके कार्यक्रमों से सैकड़ों युवा लाभान्वित हो चुके हैं।
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Disclaimer: This content has been published by the user directly on Dailyhunt, an intermediary platform. Dailyhunt has neither reviewed nor has knowledge of such content. Publisher: The Business Stories