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Patharo Ki Barish ( पत्थरों की बारिश )

Author: जीलानी बानो

Hindi

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जीलानी बानो का उपन्यास "पत्थरों की बारिश" सामाजिक उत्पीड़न एवं पीढ़ी-दर-पीढ़ी के शोषण के खिलाफ़ एक मर्मभेदी दस्तावेज है। उपन्यास युगबोध का एहसास कराते हुए तेलांगना के जमींदारों और ताल्लुकेदारों द्वारा किए गए जुल्मों को रेखांकित करता है। बंधुआ गुलामी, कमजोर के प्रति अन्याय, शोषण, तकलीफों के विरुद्ध एक अलख जलाता हुआ यह एक जीवंत उपन्यास है। लेखिका ने घटनाओं को अपने परिवेश के साथ उपन्यास में ऐसी शिल्प और भाषा दी है जो पाठकों को उस युग में सहज रूप से ले जाती है और मार्मिक घटनाओं से रूबरू कराती है। उपन्यास की सहजता इसे पठनीय और विशिष्ट बनाती है और पाठक की विवश करती है कि एक बार में संपूर्ण उपन्यास का अवलोकन और पठन-पाठन करे। उपन्यास पाठक के सामने यह प्रश्नचिह्न खड़ा करता है कि आजादी के बाद समतामूलक समाज का जो सपना था क्या उसकी स्थापना हो सकी ? प्रजातंत्र के इस दौर में जन को सही और सच्चे अथों में स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार मिल सके ? क्या कमजोर आदमी अन्याय, शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ सही और सच्चे अथों में न्याय पा सका? क्या केवल आजादी का हस्तांतरण हुआ है और सामाजिक स्थितियाँ वैसी हैं जहाँ आम-आदमी न्याय को पाने के लिए आज भी वंचित है ? इन सवालों से उपन्यास पाठकों की बेचैन ही नहीं करता है बल्कि चितन के लिए प्रेरित भी करता है। यह कृति एक युग का एहसास कराने के कारण संग्रहणीय भी है क्योंकि जो इतिहास में है, उससे कहीं हटकर सामाजिक सरोकारों के माध्यम से यह उपन्यास बताता है।

  • Release Date:
  • Book Size: 489 KB
  • Language: Hindi
  • Category: Novel

  • 2017-04-24 20:08:19.0

    Prashant P






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