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असम नागरिकता विवाद पर भाजपा नेता का बड़ा बयान, कहा- असम की तरह बिहार में भी बने NRC

PATNA : असम में एनआरसी लगभग बन कर तैयार हो गया है। इसके अनुसार लगभग चालिस लाख लोग विदेशी नागरिक हैं। वैसे
बिहार-झारखंड सहित देश के कई राज्यों से आकर असम में रहने वाले लोगों का आरोप है कि उनका नाम इस लिस्ट में नहीं
है। जबकि उनलोगों ने सेंटर पर जाकर फॉर्म फिलअप किया था।

उधर मंगलवार को लोक सभा और राज्य सभा में एनआरसी को लेकर जमकर हो हंगामा हुआ। सेंसेटिव मामला होने के कारण
इस मुद्दे की आंच अब बिहार तक पहुंच गई है। बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता और भाजपा सांसद अश्वनी चौबे का ताजा बयान
सामने आया है। इसमें उन्होंने कहा है कि- ''ऐसे घुसपैठिये चाहें बंगाल में हों, बिहार में हों या दिल्ली में इन्हें निकाल कर बाहर
करना चाहिए। निश्चित रूप से बांग्लादेशी बिहार में हैं, बंगाल में हैं। निश्चित रूप से जो असम में हुआ है वो बिहार में भी होना
चाहिए। बिहार हो बंगाल हर जगह करना करना चाहिए, इसमें कोई मतभेद नहीं है। ये आतकंवादियों के लिए धर्मशाला है।'' वैसे
चौबे जी ने यह बताया कि बिहार के नागरिकों को एनआरसी में नाम क्यों नहीं शामिल किया गया है। क्या एनआरसी में नाम
नहीं होने के बाद उनके संवैधानिक अधिकार बरकरार रहेंगे या नहीं?

दूसरी और भोजपुरी गायक और भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने भी एनआरसी पर जमकर मोर्चा खोल दिया है। मनोज तिवारी
के अनुसार दिल्ली से अवैध घुसपैठियों को भी बाहर किया जाना चाहिए। लोकसभा सांसद और दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज
तिवारी ने कहा, ''हम दिल्ली में खासतौर पर उत्तरी पूर्वी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली यमुना पार के इलाकों में और बाकी इलाकों में यह
समस्या है, हमारे बाकी साथी सांसदों ने भी बताया है। दिल्ली में जो अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या रह रहे हैं वो अपराध में
लिप्त हो रहे हैं। वो शहरी और सभ्य नागरिकों के लिए खतरा हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें यहां से हटाया जाए। असम
से हमें बड़ी सीख मिली है, यहां के भी बंग्लादेशी, रोहिंग्या को वापस भेजना चाहिए।''

बताते चले कि बिहार सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री और बीजेपी नेता विनोद नारायण झा ने कहा कि शर्णार्थियों और घुसपैठियों में अंतर होता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को ये सोचना चाहिए कि ये देश भारतीयों के लिए है। किसी घुसपैठियों के लिए नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि मानवाधिकार क्या सिर्फ घुसपैठियों के लिए ही हैं, भारतीयों के लिए नहीं?

उन्होंने कहा कि घुसपैठिये अगर इस देश के नागरिक हो जाएंगे तो पासपोर्ट की क्या जरूरत है। उन्होंने विपक्ष पर वोट की राजनीति करने का आरोप लगया। उन्होंने पूछा कि कश्मीर में जब हिन्दुओं को भगाया जा रहा था तब उन्हें इनकी याद क्यों नहीं आई। एनआरसी का मुद्दा संवैधानिक है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही सरकार कार्रवाई कर रही है।

वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे पर राजद ने भी पलटवार किया है। राजद नेता भाई वीरेंद्र ने कहा कि चुनाव आने वाले हैं। बीजेपी और आरएसएस एजेंडा तय कर रही है। देश में हिन्दू-मुसलमान तय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोई दूसरे देश से आया है और यहां रहना चाहता है तो उसे नागरिकता मिलनी चाहिए। वाजपेयी सरकार के दौरान इन्हें क्यों नहीं याद आया।

Dailyhunt
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