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बक्सर
जन-सेवा करने से मुझे कोई नहीं रोक सकता: गुप्तेश्वर पाण्डेय

बक्सर(विक्रांन्त): बिहार विधान सभा चुनाव के 243 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है लेकिन एक ही सीट पर पूरे देश- दुनिया की नजर टिकी हुई थी. वह सीट है बक्सर. बक्सर सीट इसलिए सबसे ज्यादा चर्चा में थी क्योंकि यहाँ से देश भर में चर्चित बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय के चुनाव लड़ने की चर्चा थी. सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आश्वासन पर 6 महीना पहले डीजीपी जैसे बड़े पद को त्याग कर गुप्तेश्वर पाण्डेय विधान सभा चुनाव बक्सर से लड़ने की तैयारी कर चुके थे.

लेकिन आखिरी समय तक नीतीश कुमार और बीजेपी ने उन्हें फंसाकर रखा और नामांकन से ठीक एक दिन पहले उन्हें टिकट देने से मना कर दिया. गुप्तेश्वर पाण्डेय के विधान सभा चुनाव लड़ने की वजह से बक्सर पर देश दुनिया के मीडिया की नजर टिकी हुई थी. बक्सर के लोग बड़े उत्साहित थे. क्योंकि बहुत दिनों के बाद उन्हें एक बड़ा नेता मिलने जा रहा था. चौसा के अमर यादव कहते हैं-" हमलोग RJD के समर्थक हैं. हमेशा RJD को वोट दिया है. लेकिन गुप्तेश्वर पाण्डेय को इसबार जिताने का फैसला लिया था. हमें उनसे बहुत उम्मीद थी. इतना होनहार लोकप्रिय व्यक्ति हमारा विधायक बनेगा तो हमारे क्षेत्र का विकास होगा.

लेकिन नीतीश कुमार बीजेपी ने उन्हें धोखा दे दिया. उन्हें तो लालू यादव से बात कर RJD से मैदान में आ जाना चाहिए था. चौसा के ही खुर्शीद आलम कहते हैं-" पाण्डेय जी के आने से बहुत उम्मीद थी. इसबार बक्सर की जनता जाति-मजहब और पार्टी से ऊपर उठकर उनका समर्थन करनेवाली थी लेकिन वो चुनाव मैदान में नहीं आ सके. उन्हें तो निर्दलीय चुनाव मैदान में आ जाना चाहिए था. इसबार बक्सर की जनता उन्हें रिकॉर्ड वोट से जीतकर भेंज देती. उन्हें बीजेपी-जेडीयू का मोह छोड़ देना चाहिए. गुप्तेश्वर पाण्डेय को लेकर पुरे शाहाबाद में तरह तरह की चर्चा है.

कुछ लोगों का मानना है कि सुशांत केस को लेकर शिव सेना ने बीजेपी पर दबाव बनाकर उनका टिकट कटवा दिया. वहीँ कुछ लोगों का मानना है कि उनकी लोकप्रियता से हमेशा नाखुश वाले बड़े नेताओं ने एक सोंची समझी रणनीति के तहत गुप्तेश्वर पाण्डेय को राजनीति में आने से पहले ही ख़त्म कर देने की कोशिश की है. लेकिन ये माननेवालों की भी कमी नहीं है कि बिहार बीजेपी के नेता भी गुप्तेश्वर पाण्डेय की लोकप्रियता से डर गए थे. बक्सर के शिवानंद सिंह कहते हैं', गुप्तेश्वर पाण्डेय से बिहार बीजेपी के नेता डर गए थे.

सबसे ज्यादा ब्राहमण नेता क्योंकि गुप्तेश्वर पाण्डेय के पार्टी में आ जाने से उनकी राजनीति ख़त्म हो जाती. लेकिन सबसे बड़ा सवाल- क्या एक पुलिस अधिकारी इतना लोकप्रिय हो सकता है, जिससे बड़े बड़े नेता डर जाएँ? अगर गुप्तेश्वर पाण्डेय में इतना दम था तो फिर टिकट नहीं मिलने के बाद बगावत क्यों नहीं की ? अपना टिकट कटने से नाराज ब्राहमणों की नाराजगी को हवा क्यों नहीं दी? इससे भी बड़ा सवाल ये है कि इतना चर्चित, इतना लोकप्रिय अधिकारी विधान सभा चुनाव निर्दलीय लड़ने की हिम्मत क्यों नहीं दिखा पाया? गुप्तेश्वर पाण्डेय ने इन सवालों के जबाब में एक लाइन कहा-" मैं अब एक पार्टी का अनुशासित कार्यकर्त्ता हूँ. राजनीति में आने का मकसद विधायक बनना भर नहीं बल्कि जनता की सेवा करना था. चुनाव नहीं लड़ पाया तो क्या हुआ, मुझे जनसेवा से कोई नहीं रोक सकता.

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