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केंद्र सरकार लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र को बढ़ा सकती है, दस सदस्यीय कमेटी का किया गठन

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (डब्ल्यूसीडी) ने देश में लड़कियों की शादी, मातृत्व की उम्र और उससे जुड़े हुए अन्य तमाम पहलुओं पर विचार करने के लिए एक दस सदस्यीय कार्यबल का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता जया जेटली करेंगी। केंद्रीय डब्ल्यूसीडी मंत्रालय द्वारा शनिवार को दी गई जानकारी के मुताबिक यह कार्यबल अगले महीने 31 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगा। जिसके बाद लड़कियों की शादी, मातृत्व और मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में कमी लाने जैसे तमाम मसलों पर सरकार का रूख साफ हो सकेगा।

बजट में वित्त मंत्री की सिफारिश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 के अपने बजट भाषण में लड़कियों के मातृत्व की उम्र से जुड़े सभी मुद्दों पर गौर करने के लिए एक कार्यबल का गठन करने का प्रस्ताव किया था। इसी आधार पर डब्ल्यूसीडी मंत्रालय ने उक्त कार्यबल गठित किया है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से बीते 4 जून को ही इस संबंध में राजपत्र में अधिसूचना जारी कर दी गई है।

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा था कि वर्ष 1978 में तत्कालीन शारदा अधिनियम 1929 में संशोधन कर लड़कियों की शादी की उम्र को 15 वर्ष से बढ़ाकर 18 वर्ष कर दिया था। लेकिन इसके बाद भारत प्रगति के पथ निरंतर आगे बढ़ता रहा और लड़कियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने और करियर बनाने के अवसर भी मिलने लगे। ऐसे में एमएमआर को कम करने के साथ-साथ पोषण स्तर बेहतर करना भी निरंतर आवश्यक है।

ये हैं कार्यबल के 9 सदस्य

कार्यबल की अध्यक्ष जया जेटली हैं। उनके अलावा इसमें नीति आयोग में स्वास्थ्य सदस्य डॉ़ विनोद पॉल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में सचिव, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में सचिव, उच्च शिक्षा विभाग में सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में सचिव और विधायी विभाग, सचिव पदेन सदस्य के रूप में शामिल हैं। इसके अलावा नई दिल्ली से सुश्री नजमा अख्तर, महाराष्ट्र से सुश्री वसुधा कामथ, गुजरात से डॉ़ दीप्ति शाह को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

इन विषयों पर करेगा विचार

कार्यबल विवाह और मातृत्व की आयु के इन सभी पहलुओं के साथ सह-संबंध पर गौर करना, मां का स्वास्थ्य, चिकित्सीय सेहत एवं पोषण की स्थिति और गर्भावस्था, जन्म एवं उसके बाद शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, कुल प्रजनन दर, जन्म के समय लिंग अनुपात, बाल लिंग अनुपात समेत इस संदर्भ में स्वास्थ्य और पोषण से संबंधित अन्य प्रसांगिक बिंदु शामिल है।

इसके अलावा लड़कियों के बीच उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के उपाय सुझाना, कार्यबल की सिफारिशों में विधायी उपाय और कानूनों में संशोधन सुझाना, सिफारिशों को लागू करने के लिए समयसीमा के साथ एक विस्तृत शुभारंभ योजना तैयार करना, आवश्यकता पड़ने पर कार्यदल अन्य विशेषज्ञों को अपनी बैठकों में आमंत्रित कर सकता है। कार्यदल को नीति आयोग द्वारा सचिवालयी और कार्यालयी सहायता प्रदान की जाएगी।

Dailyhunt
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