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काँगड़ा
हिमाचल जनादेश विशेष:फिलहाल भाजपा 'मिशन राजस्थान' को लेकर नहीं हो सकी सफल

हिमाचल जनादेश,शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार

अशोक गहलोत की सरकार को गिराने के लिए सचिन पायलट के इरादे तो बुलंद थे लेकिन उनकी प्लानिंग और उनकी रणनीति बेहद कमजोर साबित हुई । अपने साथ 30 विधायकों के होने का सचिन पायलट दावे तो बहुत करते रहे लेकिन जब शक्ति प्रदर्शन की बारी आई तो वह पीछे हट गए । दूसरी ओर सोमवार सुबह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आनन-फानन में आपने विधायकों की बैठक बुलाकर अपना जोरदार शक्ति प्रदर्शन करके यह बता दिया कि सरकार स्थिर है और कार्यकाल पूरा करेगी । अपने शक्ति प्रदर्शन में मुख्यमंत्री गहलोत ने 109 विधायकों के समर्थन होने का दावा किया है ।

अब गहलोत और पायलट के बीच तीसरी 'शक्ति' की बात कर ली जाए, तीसरी शक्ति यानी भाजपा । भाजपा फिलहाल अपने 'मिशन राजस्थान' में सफल होती नहीं दिख रही है । राजस्थान में कांग्रेस सरकार के ऊपर छाए संकट के बादलों पर भारतीय जनता पार्टी 'इंतजार करो देखो' की मुद्रा में है । भारतीय जनता पार्टी अब सचिन पायलट के शक्ति प्रदर्शन का इंतजार करेगी। राजस्थान में सत्ता पलटने के लिए जो दो दिन से खतरे की घंटी बजी थी वह फिलहाल थम गई है लेकिन आगे मुख्यमंत्री गहलोत को सचिन पायलट और भाजपा पर नजर रखनी होगी ।

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कांग्रेस की ओर से सचिन पायलट को मनाने की जा रही है पुरजोर कोशिश:
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की ओर से नाराज चल रहे पायलट को मनाने की कोशिश की जा रही है । प्रियंका गांधी, पी चिदंबरम और रणदीप सुरजेवाला ने सचिन पायलट से बात की है । यही नहीं रणदीप सुरजेवाला ने सचिन पायलट को तो दोबारा गहलोत के साथ लौटने का न्योता भी दिया है । उन्होंने यहां तक कह दिया कि सचिन पायलट के लिए दरवाजे खुले हैं, वो आएं उनकी हर समस्या पर बात की जाएगी । संभव है कि सचिन पायलट कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बात मान जाए और दोबारा गहलोत के साथ सरकार में शामिल हो सकते हैं ? हम आपको बता दें कि संख्या बल के हिसाब से गहलोत की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है ।‌अगर सचिन पायलट की शर्तें मानी जाती हैं तो निश्चित ही कांग्रेस सरकार अच्छी स्थिति में आ जाएगी । अगर ऐसा नहीं होता है तो पायलट की नाराजगी आज नहीं तो कल गहलोत सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है । पायलट अभी दिल्ली में हैं और उन्होंने खुले तौर पर पार्टी के खिलाफ असंतोष प्रकट किया है ।

भाजपा चुप नहीं बैठेगी, अशोक गहलोत को अपने विधायकों की करनी होगी देखभाल:
आज भले ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा और सचिन पायलट की बाजी पलट दी हो लेकिन उसे अपने विधायकों को लेकर बहुत ही सचेत रहना होगा । राजस्थान राज्य भाजपा के कई नेता सचिन पायलट के लगातार संपर्क में बने हुए हैं । भाजपा के लिए कांग्रेस की राजस्थान में सरकार गिराने के लिए यह सेमीफाइनल माना जा रहा है, संभव है कुछ समय बाद भाजपा राजस्थान में सत्ता गिराने के लिए फाइनल भी खेल सकती है । हालांकि मुख्यमंत्री गहलोत इस बात को जानते हैं तभी आज लंबी बैठक खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री ने अपने सभी विधायकों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच में होटल पहुंचा दिया है । सचिन पायलट पिछले दो दिनों से दिल्ली में ही हैं ।

दूसरी ओर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी भी अब राजस्थान के सत्ता संग्राम में कूद पड़ी है । गहलोत और सचिन पायलट के विवाद पर भाजपा के वरिष्ठ नेता ओम माथुर ने बताया कि राजस्थान में सरकार गिराने के लिए कांग्रेस हमारे ऊपर आरोप लगा रही है जबकि सच्चाई यह है कि वह पहले अपना घर संभाले ।

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