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छात्राओं के साथ दिल्ली पुलिस ने जो किया, क्या उसकी इजाजत देता है संविधान ?

दिल्ली की जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (JNU) में फीस बढ़ोत्तरी के ख़िलाफ मार्च निकाल रहे छात्रों को दिल्ली पुलिस की बर्बरता का सामना करना पड़ा. पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को बेरहमी से दौड़ा-दौड़ा कर पीटा. इस दौरान छात्राओं को भी नहीं बख्शा गया. दिल्ली पुलिस ने उनके कपड़े तक फाड़ डाले.

दरअसल, फीस बढ़ोत्तरी के ख़िलाफ जेएनयू छात्रों ने सोमवार को शांति मार्च निकाला था. सुबह जैसे ही छात्र विश्वविद्यालय से मार्च पर निकले, पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया. छात्रों ने इसका विरोध किया जो पुलिस को नागवार गुज़रा और पुलिस ने उनपर बेरहमी से लाठियां भांजनी शुरु कर दीं.

हज़ारों की तादाद में तौनात पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने छात्रों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा. जिसमें कई छात्रों को गंभीर चोटें भी आईं. सोशल मीडिया पर पुलिस की बर्बरता की कई तस्वीरें सामने आई हैं. पुलिस ने इस दौरान महिला छात्रों को भी नहीं बख्शा.

JNU की छात्रा अपेक्षा प्रियदर्शनी ने फेसबुक पर लिखा है कि, 'मुझे बैरीकेडिंग से नीचे फेंक दिया गया, मेरे कपड़े फाड़ दिए गए, मुझे काफी चोटें आई हैं. कई छात्रों के साथ इससे भी ज़्यादा बुरा बर्ताव किया गया. नरेन्द्र मोदी अपने देश के छात्रों से ऐसा बर्ताव करते हैं. हम सभी के लिए समान अवसर शिक्षा की मांग करते हैं. जिससे कि जो बच्चे उपेक्षित समाज से आते हैं वो परेशानी ना झेलें.'

वामपंथी नेता कविता कृष्णन ने भी ट्विटर के ज़रिए पुलिस की बरबर्ता की कहानी को साझा किया है. उन्होंने जेएनयू छात्रों के हवाले से बताया कि महिला छात्रों के साथ पुलिस ने बदसलूकी की और उनके कपड़े तक फाड़ डाले.

उन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो भी शेयर किया है. जिसमें पुलिस के साथ नीले कपड़े में एक शख्स नज़र आ रहा है. जो छात्रों को लात-घूंसे से पीटता दिखाई दे रहा है. उन्होंने इसे शेयर करने के साथ पूछा है कि ये शख़्स कौन है?

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