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दिल्ली के दरिंदों को मौत देने के लिए तैयार हैं जो जल्लाद, उनको मिलती मात्र इतनी पगार

निर्भया केस के दोषियों को फांसी दोषियों को फांसी देने की तैयारियों में तिहाड़ जेल प्रशासन जुटा है. देश में अब केवल दो जल्लाद यूपी के लखनऊ और मेरठ जेल में मौजूद है. लखनऊ का जल्लाद इलियास इस समय बीमार चल रहा है. ऐसे में मेरठ जेल के पवन जल्लाद द्वारा ही इन चारों को फांसी देने की संभावना बन गई है.

भले ही यूपी में केवल दो जल्लाद ही रह गए हो, लेकिन अब फांसी की सजा कम होने के कारण पवन जल्लाद अपनी पहली फांसी का इंतजार कर रहे हैं. पवन का कहना है कि अपने दादा के सहायक के तौर पर तो वह पांच फांसी देने में शामिल रहे, लेकिन स्वतंत्र तौर पर वह पहली फांसी का इंतजार कर रहे हैं. वह दुआ कर रहे हैं कि निर्भया के दोषियों को फांसी देने के लिए उन्हें बुलाया जाए.

पवन जल्लाद को सरकार से केवल पांच हजार रुपए प्रतिमाह का वेतन प्राप्त होता है. इतनी छोटी से रकम में वह गुजारा नहीं कर पाते. पांच बेटियों और दो बेटों के पिता पवन का कहना है कि आर्थिक संकट से निपटने के लिए उसका वेतन बढ़ाकर 20 हजार रुपए किया जाना चाहिए. पेट भरने के लिए उसे कपड़ा बेचने का काम करना पड़ रहा है. आधुनिक समय में जल्लाद बनने के लिए कोई युवा तैयार नहीं है. पवन जल्लाद की अगली पीढ़ी भी जल्लाद बनने को राजी नहीं है.

उसके पिता मम्मू जल्लाद और परदादा लक्ष्मण सिंह भी मशहूर जल्लाद रह चुके हैं. पवन ने फांसी लगाने का जज्बा अपने दादा कल्लू जल्लाद से सीखा. पवन बताते हैं कि उसके दादा कल्लू जल्लाद देश की विभिन्न जेलों में जाकर फांसी देते थे. उन्होंने इंदिरा गांधी के हत्यारों और मशहूर रंगा-बिल्ला को फांसी दी थी. उनसे ही सीखकर पवन ने भी जल्लाद बनने की ठानी. अपने दादा के साथ वह पांच लोगों को फांसी दिलवा चुके हैं.

मेरठ की कांशीराम आवासीय कालोनी में रहने वाले पवन जल्लाद का कहना है कि यह लम्हा देश के इतिहास में दर्ज हो जाएगा. वह खुद अपने हाथों से निर्भया के दोषियों को फांसी देना चाहता है. अगर उसे बुलाया गया तो इससे ज्यादा खुशी की कोई बात नहीं होगी.

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