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नागरिकता बिल का क्रेडिट भले हो मोदी के नाम, लेकिन असल जीत तो ये शाह की है..

नरेन्द्र मोदी सरकार के नाम एक और बड़ी जीत बुधवार को दर्ज हुई, जब बहुचर्चित नागरिकता संशोधन बिल (CAB) राज्य सभा में भी पास हो गया। इससे पहले सोमवार को बिल लोक सभा में पारित हो चुका है। अब विधेयक मंजूरी के लिये राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी की मुहर लगते ही विधेयक कानून में बदल जाएगा। इसके बाद केन्द्र सरकार इस कानून को देश भर में लागू करेगी।

इस बिल के पास हो जाने से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफग़ानिस्तान से भारत में आकर बसे शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त होने का रास्ता साफ हो गया है। लोक सभा में 80 वोटों के मुकाबले 311 वोटों से पारित होने के बाद बिल बुधवार को राज्य सभा में लाया गया था। यहाँ भी बिल पर गरमागरम बहस होने के बाद वोटिंग कराई गई। चूँकि राज्य सभा में कुल 240 सांसदों में से 209 सदस्यों ने वोटिंग में भाग लिया और 92 वोटों के मुकाबले बिल के पक्ष में 117 वोट पड़े, इसलिये वोटिंग में बहुमत से बिल पास हो गया।

पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफग़ानिस्तान में प्रताड़ित अल्पसंख्यक यानी हिन्दू, जैन, बौद्ध, सिख, इसाई आदि समुदाय के जो लोग वहाँ से भारत में आये हैं और वर्षों से शरणार्थी के तौर पर असहाय जीवन जीने को मजबूर हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता देकर सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देने के लिये मोदी सरकार के गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को जब लोक सभा में नागरिकता संशोधन बिल लेकर आये तो कांग्रेस समेत विपक्ष ने काफी हंगामा किया था और इस बिल को भारतीय संविधान की मूल भावना के विरुद्ध बताया था।

इसमें मुस्लिम शरणार्थियों के लिये प्रावधान न किये जाने पर नाराज़गी जताई थी, तब अमित शाह ने विपक्ष को जवाब दिया था कि तीनों पड़ोसी देशों में इस्लाम धर्म को राज्य धर्म की मान्यता दी गई है और वहाँ बहुसंख्यक मुस्लिमों के साथ कोई उत्पीड़न नहीं होता है। चूँकि अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव और हिंसा होती है, जिससे वहाँ के अल्पसंख्यक भारत में आकर शरण लेते हैं। भारत की संस्कृति रही है, शरणार्थियों को आश्रय देने की। इसलिये यह बिल न तो किसी समुदाय विशेष के साथ कोई उपेक्षित व्यवहार करता है और न ही यह धार्मिक पक्षपात करने वाला है।

यह केवल पड़ोसी देशों से भारत में आकर बसे अल्पसंख्यक समुदाय के शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देकर उन्हें उनके मानवाधिकारों के अनुसार जीवन स्तर को बेहतर बनाने या संक्षेप में कहें तो 'शरणार्थियों को न्याय' देने के लिये लाया गया है। लोक सभा में वोटिंग कराने पर बिल बहुमत से पारित होने के बाद बुधवार को राज्य सभा में लाया गया। यहाँ भी बिल पर तीखी बहस हुई, जिसमें अमित शाह ने सभी सवालों के उत्तर दिये।

इसके बाद रात साढ़े आठ बजे के बाद वोटिंग कराई गई, जिसमें लोक सभा में बिल का समर्थन करने वाली शिवसेना वॉक आउट कर गई और सदन में उपस्थित 209 सदस्यों में से 117 सदस्यों ने बिल के पक्ष में मतदान किया, जबकि 92 वोट बिल के विरोध में पड़े। इस प्रकार बिल बहुमत से पारित होने के बाद दिल्ली में बसे शरणार्थियों ने जमकर खुशी मनाई। पीएम मोदी ने बिल के पक्ष में मतदान करने वाले सांसदों का आभार व्यक्त किया और इस बिल के पास होने को देश के लिये ऐतिहासिक बताया। इस बिल के पास होने से विशेष कर पाकिस्तानी और बांग्लादेशी अल्पसंख्यक हिंदुओं को परोक्ष रूप से काफी संबल मिलेगा, जो वहाँ यातनामय जीवन जी रहे हैं।

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