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पाकिस्तान से अगर हुई जंग, तो भारतीय मुसलमान रहेगा किधर ?

13 सितंबर को पाकिस्तान अधिकृत काश्मीर के मुज़फ्फराबाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जिस तरह कौम और मज़हब के नाम पर भारत के 20 करोड़ मुसलमानों को उकसाया और उस पर भारत के मुसलमानों ने जिस तरह तवज्जो ना देकर इमरान खान को अंगूठा दिखाया वह देखने लायक चीज़ है।

देखने लायक चीज़ उनके लिए भी है जो बात बेबात पर देश के मुसलमानों को पाकिस्तान भेजते हैं और बात बात पर पाकिस्तानी कहते हैं। भारत के उन्हीं मुसलमानों ने इमरान खान की जज़्बाती बातों को नोटिस ही नहीं लिया और लगभग दुत्कार दिया।

भारत के मुसलमानों के लिए पाकिस्तान उन 56 मुस्लिम बहुल मुल्कों जैसा ही एक मुल्क है , पाकिस्तान एक मात्र ऐसा मुस्लिम मुल्क है जिससे हमारे देश के रिश्ते बेहद खराब हैं। बस पाकिस्तान से भारतीय मुसलमानों का बेहद मामूली सा संबन्ध इसलिए है क्युँकि वहाँ 1947 में चले गये उनके अपने सगे वहाँ रहते हैं , उनकी खैरियत , उनके खुश रहने की दुवाएँ , उनसे मिलने की तड़प , उनके मरने पर उनको मिट्टी ना दे पाने का दर्द , जो ज़िन्दा हैं उनसे मिलने की उम्मीद , उनके खुशी और ग़म में शामिल होने की उम्मीद ही हम जैसों के लिए पाकिस्तान और भारत के बेहतर संबन्धों के लिए दुआ की वजह है।

पर यह सब उम्मीदें भी 'मुल्क' के हितों की क़ीमत पर तो कत्तई नहीं , पर मेरी समझ में इन दोनों मुल्कों के रिश्ते खराब होने की वजहें केवल और केवल राजनैतिक है , दुश्मनी के नाम पर दोनों तरफ के लोगों को बेवकूफ बनाया जाता है , राष्ट्रवाद और देशप्रेम के नाम पर दोनों मुल्कों के लोगों के जज़्बात उभारे जाते हैं और सत्ता पाई जाती है। इसमें बेकसूर काश्मीरी पिसते हैं।

भारत और पाकिस्तान के बीच चार लड़ाईयाँ हो चुकी हैं , पहली लड़ाई 1948 में काश्मीर में हुई थी और उसके भारतीय नायक थे नौशेरा के शेर ब्रिगेडियर उस्मान , भारत और पाकिस्तान के बीच दूसरी लड़ाई 1965 में हुई थी और इस लड़ाई के भारतीय नायक थे 'शहीद वीर अब्दुल हमीद' और तीसरी लड़ाई 1971 में तथा चौथी लड़ाई कारगिल में हुई जिसमें अब यह तथ्य है कि कारगिल की चोंटी पर तिरंगा फहराने वाले जवान मुसलमान थे जो नारे तकबीर के साथ कारगिल को फतह किए।

सन 1948 में ब्रिगेडियर उस्मान ना होते तो भारत काश्मीर खो चुका होता और 1965 में वीर अब्दुल हमीद ना होते तो भारत पंजाब खो चुका होता , और कारगिल में मुसलमान सैनिक ना होते तो शायद लड़ाई और लंबी चलती।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और भारत के टुटपुजिया नेताओं को भारत के मुसलमानों का यह इतिहास दिमाग में रख कर बयान देना चाहिए।

अब एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भारत-पाकिस्तान में युद्ध हुआ तो देश के 20 करोड़ मुसलमान किस तरफ़ रहेंगे ? सवाल बहुत गंभीर है क्युँकि 1965 के बाद इस देश में मुसलमानों के साथ जो हुआ है वह दुनिया ने देखा है , भारत में उनको दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया है , हर जगह मारा काटा जा रहा है , सरकारी नौकरियों में 1% में समेट दिया गया है , दाढ़ी टोपी के प्रति फैलाई नफ़रत की भेंट हर कुछ दिन में वह चढ़ाया जा रहा है , मेरठ , मलियाना , मुज़फ्फरनगर , भागलपुर , गुजरात , सूरत जैसे लाखों दंगों में लाखों लाख मुसलमानों का कत्लेआम इसी देश में हुआ , माँ बहनें रेप की गयीं , कोख को तलवार से चीर कर बच्चे निकाले गये , उनको त्रिशूल में गोद कर जयश्रीराम के नारे लगाए गये।

सब कुछ हुआ , फिर भी आज ज़रूरत पड़ी तो 1 नहीं लाखों वीर अब्दुल हमीद और ब्रिगेडियर उस्मान मिलेंगे।

यकीं तो करो

ये लेख स्वतंत्र टीकाकार मोहम्मद जाहिद के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।

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