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वाराणसी में बोले मोदी- CAA पर दुनियाभर का दबाव, लेकिन कायम है और रहेगी सरकार

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने वाराणसी दौरे के दौरान चंदोली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए नागरिकता संशोधन कानून पर बड़ा बयान दिया है। पीएम मोदी ने कहा, दुनियाभर के तमाम दबावों के बाद भी नागरिकता संशोधन कानून(सीएए) पर हम कायम थे और कायम रहेंगे। नागरिकता कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस कानून को लोग लगातार संविधान विरोधी बता रहे हैं। 2 महीने से ज्यादा वक्त से दिल्ली के शाहीन बाग में महिलाएं इस कानून के खिलाफ धरने पर बैठी हैं। केंद्र सरकार कई बार साफ कर चुकी है कि इस कानून को वापस नहीं लेंगे।

पीएम मोदी ने कहा, अब स्थितियां बदल रही हैं, देश बदल रहा है। जो आखिरी पायदान पर रहा है, उसे अब सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। महादेव के आशीर्वाद से देश आज वो फैसले भी ले रहा है, जो हमेशा पीछे छोड़ दिए जाते थे। आजादी के बाद लंबे कालखंड तक इस आखिरी पायदान को बनाए रखा गया, क्योंकि उनकी समस्याओं को सुलझाने में नहीं, उलझाने में राजनीतिक हित सिद्ध होते थे

पीएम मोदी ने कहा, हमारी सरकार समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास के लाभ पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। 50 करोड़ से अधिक देशवासी जिन्हें आज आयुष्मान भारत योजना से 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज सुनिश्चित हुआ है, वो 70 वर्षों से विकास के आखिरी पायदान पर रहे लोग ही हैं।

पीएम मोदी ने कहा, जल जीवन मिशन के तहत आने वाले 5 वर्षों में हर घर तक जल पहुंचाने के लिए हमें पूरी शक्ति से काम करना है।मैं आश्वस्त करता हूं कि इस काम में न तो बजट आड़े आएगा और न सरकार के इरादे कमजोर होंगे। BHU में आज जिस सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल का लोकार्पण हुआ है, उसका शिलान्यास 2016 के आखिरी में, मैंने ही किया था। सिर्फ 21 महीने में 430 बेड का ये अस्पताल बनकर काशी और पूर्वांचल के लोगों की सेवा के लिए तैयार हुआ है।

पीएम मोदी ने कहा, बाबा विश्वनाथ की नगरी को ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर से जोड़ने वाली काशी-महाकाल एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई गई है।काशी में बाबा के दर्शन के बाद, उज्जैन में महाकाल के दर्शन कर पाएंगे। इसी ट्रेन में आगे बढ़कर इंदौर में ओंकारेश्वर में श्रद्धासुमन अर्पित कर पाएंगे।

पीएम मोदी ने कहा, काशी विश्वनाथ धाम में तमाम कार्य तेज़ी से पूरे किए जा रहे हैं। बहुत ही जल्दी से बाबा का दिव्य प्रांगण एक आकर्षक और भव्य रूप में हम सभी के सामने आएगा। इसी तरह अयोध्या में भी श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन हो चुका है। आज काशी आने वाला हर श्रद्धालु सुखद अनुभव लेकर यहां से जाता है। कुछ दिन पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति भी यहां आए थे, तो यहां के अद्भुत वातावरण, दिव्य अनुभूति से बहुत मंत्रमुग्ध थे। सोशल मीडिया में उन्होंने काशी के साथियों की बहुत प्रशंसा की है।

पीएम मोदी ने कहा, आज जब भारत में जब 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की बात हो रही है तो पर्यटन उसका अहम हिस्सा है। भारत के पास हैरिटेज टूरिज्म की बहुत बड़ी ताकत है। काशी समेत आस्था से जुड़े तमाम स्थानों को नई तकनीक का उपयोग करके विकसित किया जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा, काशी सहित इस पूरे क्षेत्र में हो रहे कनेक्टिविटी के काम आपकी सुविधा के साथ-साथ रोज़गार निर्माण के भी बड़े साधन तैयार कर रहे हैं। विशेषतौर पर पर्यटन आधारित रोजगार, जिसको लेकर काशी और आसपास के क्षेत्रों में बहुत बड़ी संभावना है, उनको बल मिल रहा है।

पीएम मोदी ने कहा, बीते 5 वर्षों में वाराणसी जनपद में लगभग 25 हज़ार करोड़ रुपये के विकास कार्य या तो पूरे हो चुके हैं, या काम चल रहा है। देवी अहिल्याबाई होलकर के बाद इतने बड़े पैमाने पर काशी नगरी के लिए काम हो रहे हैं, तो उसके पीछे महादेव का ही आशीर्वाद है।जो विकास के आखरी पायदान पर है, उसे पहले पायदान पर लाने के लिए काम हो रहा है। चाहे वो पूर्वांचल हो, पूर्वी भारत हो, उत्तर पूर्व हो, देश के 100 से ज्यादा आकांक्षी जिले हों, हर क्षेत्र में विकास के अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा, पं. दीनदयाल जी की आत्मा हमें हमेशा प्रेरणा देती रहती है।दीनदयाल उपाध्याय जी ने हमें अंत्योदय का मार्ग दिखाया था। यानि जो समाज की आखिरी पंक्ति में हैं, उसका उदय। 21वीं सदी का भारत, इसी विचार से प्रेरणा लेते हुए अंत्योदय के लिए काम कर रहा है।

पीएम मोदी ने कहा, आज इस क्षेत्र, दीनदयाल जी की स्मृति स्थली का जुड़ना, अपने नाम पड़ाव की सार्थकता को और सशक्त कर रहा है।ऐसा पड़ाव जहां, सेवा, त्याग, विराग और लोकहित सभी एक साथ जुड़कर एक दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित होंगे। मां गंगा जब काशी में प्रवेश करती हैं, तो वो उन्मुक्त होकर अपनी दोनों भुजाओं को फैला देतीं हैं। एक भुजा पर धर्म, दर्शन और आध्यात्म की संस्कृति विकसित हुई है और दूसरी भुजा, यानि इस पार, सेवा, त्याग, समर्पण और तपस्या, मूर्तिमान हुई है।

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