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ट्रम्प और ट्विटर के बीच विवाद जारी,ट्रम्प ने लगाया विपक्षी उम्मीदवार की मदद का आरोप

वॉशिंगटन । सुपरपॉवर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर के साथ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसकी शुरुआत तब हुई जब ‎कि ट्रम्प की कैंपेन टीम ने पुलिस कस्टडी में मारे गए अश्वेत अफ्रीकन-अमेरिकन नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड को श्रद्धांजलि देते हुए 3 जून को 3:40 मिनट का एक वीडियो ट्वीट किया था। ट्विटर ने वीडियो को कॉपीराइट पॉलिसी का उल्लंघन बताते हुए डिसेबल कर दिया। इसके बाद ट्रम्प ने ट्विटर पर आरोप लगाते हुए कहा कि लेफ्ट डेमोक्रेट को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया है।

ट्रम्प ने इस बारे में एक खबर को री-ट्वीट करते हुए लिखा, 'प्रदर्शनकारियों से सहानुभूति दिखाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति का एक कैंपेन वीडियो ट्विटर ने डिसेबल कर दिया। वह लोग कड़ी मेहनत से कट्टरपंथी वाम डेमोक्रेट की ओर से लड़ाई लड़ रहे हैं। एकतरफा लड़ाई। ये अवैध है। सेक्शन 230।' इसके जवाब में ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने ट्वीट किया, 'ये सही नहीं है और न ही अवैध है। ये वीडियो इसलिए हटाया गया क्योंकि हमें इसको लेकर कॉपीराइट संबंधी शिकायत मिली थी।'ट्विटर ने डोनाल्ड ट्रम्प के जिस कैंपेन वीडियो को हटाया है, वह तस्वीरों और प्रोटेस्‍ट मार्च की क्लिप्‍स को मिलाकर बनाया गया था। वीडियो के बैकग्राउंड में अमेरिकी राष्‍ट्रपति का संदेश भी शामिल था। फिलहाल वह वीडियो अभी भी यूट्यूब पर मौजूद है। 60 हजार से ज्यादा लोग वीडियो देख चुके हैं और 13 हजार से ज्यादा लोगों ने उसे लाइक किया है।

बीते सोमवार को ट्रम्प व्हाइट हाउस के पास एक चर्च के सामने बाइबिल के साथ फोटो खिंचाने जा रहे थे। इसी दौरान वहां ब्लैक लाइव मेटर प्रदर्शन में शामिल बहुत से प्रदर्शनकारी इकट्ठा हो गए थे, जिन्हें वहां से पीछे धकेलने के लिए उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, रबर बुलेट चलाई गईं और साउंड बम छोड़े गए। इसके बाद पूरे अमेरिका में विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए।अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन और दूसरे समूहों ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रम्प और सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों और कैंपेनर्स के संवैधानिक अधिकारों का हनन किया है। एसीएलयू ने कहा, 'पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की भीड़ पर एक सामूहिक तरीके से अचानक हमला किया और इस दौरान उनपर केमिकल का छिड़काव, रबर बुलेट्स और साउंड कैनन जैसी चीजों का इस्तेमाल किया गया।' बता दें कि अमेरिकी नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वाले कई संगठनों ने डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ गुरुवार को केस दर्ज कराया है। व्हाइट हाउस के सामने प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले और स्मोक बम छोड़े थे, जिसके बाद ट्रम्प की खूब आलोचना हो रही है।

Dailyhunt
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