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सक्सेस स्टोरी : IAS बनने के जुनून में छोड़ दी नौकरी,बिना कोचिंग के क्लियर किया UPSC

देश की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली यूपीएससी की परीक्षा में छोटे शहरों से आने वाले कई प्रतिभागियों ने अपनी जगह बनाई है। ऐसा ही एक नाम वैभव त्रिवेदी का है,मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के छोटी सी तहसील लवकुश नगर के रहने वाले वैभव त्रिवेदी ने अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी क्लियर कर लिया है।

मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले वैभव के पिता स्कूल प्रिंसिपल और मां वकील हैं। 'द न्यूजलाईट ' से बातचीत में वैभव अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देते हुए कहते हैं कि पापा के प्रिसिंपल होने के चलते घर में शुरु से ही पढ़ाई का माहौल था। अपनी शुरुआती पढाई लवकुश नगर से ही करने वाले वैभव कहते हैं कि माता-पिता ने खुद में कटौती करके उनको पढाया। वैभव कहते हैं यूपीएससी में चयन की खबर सबसे पहले दोस्तों के जरिए मिली और रिजल्ट आने के बाद से ही घर में खुशी का माहौल बना हुआ है।

इंजीनियर की नौकरी छोड़ कर बनें IAS - 'द न्यूजलाईट ' से बातचीत में वैभव त्रिवेदी बताते हैं कि पांचवी तक की पढ़ाई उन्होंने लवकुशनगर से की, इसके बाद नौगांव के नवोदय स्कूल से 12 वीं तक की पढ़ाई करने के बाद IIT-BHU से 2015 में बीटेक कंपलीट किया। इंजीनियरिंग करने के बाद गुड़गांव में रहकर 2 साल तक एक प्राइवेट कंपनी में जॉब भी की, लेकिन IAS बनने के जुनून में नौकरी छोड़ दी।

दोस्त के IAS बनने के बाद छोड़ी नौकरी - वैभव कहते हैं कि उनका रूझान शुरु से ही आईएएस की तरफ था लेकिन इंजीनियरिंग करने के बाद एक्सपीरियंस के लिए प्राइवेट जॉब की लेकिन जब छतरपुर के उनके दोस्त आशीष तिवारी ने यूपीएससी एग्जाम क्लीयर कर छठीं रैंक हासिल की थी तो वह नौकरी छोड़ अखिल भारतीय सेवा की तैयारी में जुट गए। वैभव बताते हैं कि पहले प्रयास में वह इंटरव्यू देने से केवल 7 नंबर से चूक गए थे लेकिन दूसरे प्रयास में वह न केवल इंटरव्यू तक पहुंचे बल्कि एग्जाम भी क्लीयर कर लिया।

बिना कोचिंग क्लियर किया एग्जाम - वैभव बताते हैं कि उन्होंने IAS की तैयारी के लिए किसी कोचिंग की मदद न लेकर खुद से दो साल तक दिल्ली में रहकर तैयारी की। वैभव कहते हैं कि इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से होने का फायदा उन्हें यूपीएससी की तैयारी में भी मिला।

तैयारी के दौरान निगेटिविटी से बचे- वैभव बताते हैं कि पहले प्रयास में जब इंटरव्यू तक नहीं पहुंच पाया तो मन में थोड़ी निराशा हुई लेकिन हिम्मत नहीं हारी। इसके साथ तैयारी के दौरान जब कभी मन में नकारात्मक ख्यास आए तो माता-पिता और दोस्तों ने खूब सपोर्ट करते हुए उत्साह बढ़ाया जिसे सकारात्मक ऊर्जा के तैयारी करते रहे। वैभव कहते हैं कि सोशल मीडिया पर वह न के बराबर है अभी भी सिर्फ वाट्सअप पर है।

सफलता के टिप्स - अपनी परीक्षा की तैयारियों को बताते हुए वैभव कहते हैं कि प्रीलिम्स परीक्षा में वैकल्पिक प्रश्न होते हैं,इसलिए फैक्ट्स पर पकड़ बनानी होती है, जबकि मेंस में आंसर राइटिंग का फार्मेट बहुत मायने रखता है मैंने सेल्फ स्टडी के दौरान स्वयं से नोट्स बनाए थे।

वैभव ने ऑप्शनल सब्जेक्ट पॉलिटिकल साइंस और सामान्य अध्ययन पेपर में करंट अपेयर्स के नोट्स तैयार करने के लिए द हिंदू, द इंडियन एक्सप्रेस, दैनिक जागरण से काफी मदद मिली। वैभव बताते हैं कि इंटव्यू में बोर्ड ने उनसे मध्यप्रदेश में कृषि को कैसे बढ़ाया जाए, इसको लेकर प्रश्न किया और उनके उत्तर से बोर्ड के मेंबर प्रभावित हुए। वैभव कहते हैं कि अभी उनकी 327 वीं रैंक है इसलिए अपनी रैंक में सुधार के लिए एक और प्रयास करेंगे।

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