Monday, 25 May, 12.25 pm The Fact India

सियासत की सरगर्मी
मध्य प्रदेशः ज्योतिरादित्य सिंधिया होंगे उपचुनाव में BJP का चेहरा?

The Fact India : देश में भीषण गर्मी के प्रकोप के बीच मध्य प्रदेश की सियासत का भी तापमान बढ़ा हुआ है। उपचुनाव से पहले मध्य प्रदेश में सियासी घमासान जारी है। प्रदेश में जोड़-तोड़ की राजनीति के साथ दावेदारी भी शुरू हो गई है। आपको बता दें कि कांग्रेस से हाल ही में बीजेपी में आए सिंधिया समर्थक प्रभुराम चौधरी ने 200 कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बीजेपी में एंट्री करवाई, जिसके बाद उपचुनाव में महाराज सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) और भी मजबूत होते दिख रहे हैं। अब ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों ने मांग की है कि उपचुनाव में पार्टी का चेहरा सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ही हो जबकि बीजेपी का कहना है कि शिवराज ही मध्यप्रदेश में पार्टी का चेहरा हैं।

सियासत का खेल देखिए सिंधिया के समर्थकों की मांग से मध्य प्रदेश की राजनीति फिर से गरमा गई है। सिंधिया समर्थक जसवंत जाटव ने मांग की है कि उपचुनाव में बीजेपी का चेहरा ज्योतिरादित्य सिंधिया हो। बता दें कि सिंधिया समर्थक जसवंत जाटव की मांग से बीजेपी उलझन में है। सिंधिया समर्थक की मांग के बाद से मध्य प्रदेश की राजनीति में यह सवाल उठने लगा है कि क्या बीजेपी उपचुनाव शिवराज नहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के चेहरे पर लड़ेगी।

बता दें कि सियासी गलियारों में इसकी चर्चा तो थी, लेकिन सिंधिया समर्थक जसवंत जाटव ने अपनी मांग से इसे और हवा दे दी है। करेरा से पूर्व विधायक और सिंधिया समर्थक जसवंत जाटव ने कहा है कि आज शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया एक साथ हैं। यहां चुनाव बीजेपी लड़ेगी।

दरअसल उपचुनाव में करेरा से पूर्व विधायक जसवंत जाटव भी टिकट के दावेदार हैं। उन्होंने कहा है कि बीजेपी के साथ-साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया भी जनता के चहेते होंगे। जनता उनके नाम पर ग्वालियर-चंबल संभाग में वोट देते आई है, उन्होंने कहा कि ग्वालियर-चंबलल में ज्योतिरादित्य सिंधिया ही उपचुनाव में पार्टी का चेहरा होंगे।

बहरहाल मध्य प्रदेश में 24 सीटों पर उपचुनाव होने हैं। 24 में से 16 सीट ग्वालियर-चंबल संभाग से आते हैं। कांग्रेस में रहते हुए, उसे इलाके में पार्टी का चेहरा ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ही होते थे। बीजेपी के सामने मुश्किल यह है कि उस संभाग से पार्टी में पहले से कई कद्दावर नेता हैं। सिंधिया के नाम पर चुनाव लड़ने से उन नेताओं को दरकिनार करना होगा, साथ ही शिवराज के फेस को भी दरकिनार नहीं कर सकती है।

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