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188 दिन बाद भक्तों के लिए खुले मंदिरों के दरवाजे; लोग मास्क लगाकर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कर सकेंगे दर्शन

लंबे समय बाद भक्त खजराना गणेश के दर्शन कर पाएंगे।

24 मार्च को लॉकडाउन के साथ ही पूरा इंदौर लॉक हो गया था, इसके बाद से ही धर्मस्थलों पर ताले डले हुए थे
5 अगस्त को जिम, योग केंद्र, लाइब्रेरी, ब्यूटी पार्लर के शटर उठने के साथ ही नाइट कर्फ्यू भी खत्म हो गया था
लॉकडाउन के साथ 24 मार्च को बंद हुए धर्मस्थलों के दरवाजे 188 दिन बाद आम भक्तों के लिए खोलने के आदेश हो गए हैं। कलेक्टर मनीष सिंह द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि आमजन सोशल डिस्टेंसिंग के साथ, मास्क लगाकर दर्शन, प्रार्थना कर सकते हैं। सभी भक्तों, पुजारी के लिए अनिवार्य होगा कि वह मास्क ठीक से नाक के ऊपर लगाएं, गर्भगृह में प्रवेश नहीं होगा और एक दूरी बनाकर ही दर्शन कर सकेंगे। धर्मस्थलों पर चलने वाले अन्न क्षेत्र भी शुरू होंगे, लेकिन छह फीट की दूरी रखना जरूरी होगा। सैनेटाइजर भी रहेगा, हाथ धोना अनिवार्य रहेगा।

सराफा चौपाटी से खाना पैक कराने की सुविधा

सराफा की रात्रिकालीन चौपाटी की खाद्य सामग्री ले जाने की सुविधा रहेगी, यानी ग्राहक पैक कराकर ले जा सकेगा। यह चौपाटी सराफा बाजार बंद होने के बाद पूर्व समय अनुसार खुल सकेगी। मौके पर किसी ग्राहक को खाने की मंजूरी नहीं होगी। सोमवार को दोपहर के समय कलेक्टर मनीष सिंह ने धर्मस्थलों को खोलने के संकेत दिए थे। सिंह ने कहा था कि धर्मस्थलों को खोलने का विचार चल रह है।

आदेश में पांच बिंदु शामिल

आमजन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन और मास्क लगाकर ही दर्शन कर पाएंगे।
भक्त और पुजारी दोनों ही मास्क को नाक के ऊपर सही ढंग से लगाएं। पुजारी मास्क नीचे करके पूजन क्रिया करते हैं, जो कि पूरी तरह से गलत है।
सभी बड़े धर्मस्थलों में गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंधित हैं। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बाहर से ही दर्शन कराने होंगे।
धर्मस्थलों पर चलने वाले अन्नक्षेत्र शुरू किए जा सकते हैं, लेकिन भक्तों को 6 फीट की दूरी पर बैठाना होगा।
धर्मस्थलों पर साबुन से हाथ धोना या सैनिटाइज का उपयोग करना अनिवार्य है। इसकी व्यवस्था धर्मस्थल के प्रबंधन को करना होगा।
5 अगस्त को खुले थे जिम, योग सेंटर
5 अगस्त को करीब 130 दिन बाद जिम, योग केंद्र, लाइब्रेरी, ब्यूटी पार्लर के शटर उठे थे। इसके अलावा इंदौर में लगे बाजारों पर प्रतिबंध को पूरी तरह से हटा लिया गया था। अब सभी के लिए एक जैसे नियम लागू कर दिए गए थे। इसके बाद से धार्मिक स्थलों को खोले जाने की मांग उठने लगी थी।

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