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2027 तक प्रत्येक युवा हो प्रशिक्षित, रोजगारयुक्त तथा महिलाएं हों आर्थिक रूप से सशक्त : केशव प्रसाद मौर्य

2027 तक प्रत्येक युवा हो प्रशिक्षित, रोजगारयुक्त तथा महिलाएं हों आर्थिक रूप से सशक्त : केशव प्रसाद मौर्य

24Ghante Online 1 week ago

खनऊ,: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं ग्राम्य विकास विभाग के मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के उच्च अधिकारियों से ग्रामीण स्वरोजगार कार्यक्रमों की प्रगति, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ी संभावनाओं तथा प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं एवं महिलाओं को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त ली।

उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार जिला, विकास खंड एवं ग्राम स्तर तक सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण युवा एवं महिलाएं इन योजनाओं का लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें उनकी रुचि एवं स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, जिससे वे रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों का बैंकों से प्रभावी समन्वय स्थापित कराया जाए तथा स्वरोजगार स्थापित करने के लिए उन्हें आवश्यक ऋण उपलब्ध कराने में हरसंभव सहायता प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल कौशल प्रदान करना नहीं, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं एवं महिलाओं को सफल उद्यमी एवं रोजगारयुक्त नागरिक बनाना होना चाहिए।

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "विकसित भारत" के संकल्प को साकार करने के लिए "विकसित उत्तर प्रदेश" का निर्माण आवश्यक है। विकसित उत्तर प्रदेश तभी संभव है, जब ग्रामीण क्षेत्रों के युवा एवं महिलाएं कौशलयुक्त, आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनें। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक प्रत्येक युवा को प्रशिक्षित एवं रोजगारयुक्त बनाना तथा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करते हुए उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करना है।

अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानीय संसाधनों, बाजार की मांग तथा रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। कृषि आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कृषि एवं कृषि से संबंधित गतिविधियों जैसे दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, बागवानी, रेशम उत्पादन, मशरूम उत्पादन, पुष्पकृषि तथा मत्स्य पालन सहित अन्य कृषि आधारित उद्यमों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। उत्पाद आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत ड्रेस डिजाइनिंग, रेक्सिन उत्पाद निर्माण, अगरबत्ती निर्माण, फुटबॉल निर्माण, बैग निर्माण, बेकरी उत्पाद निर्माण, पत्तों से बने पर्यावरण अनुकूल कप एवं प्लेट निर्माण, पुनर्चक्रित कागज निर्माण सहित अनेक लघु उद्योगों का प्रशिक्षण दिया जाता है।

प्रक्रिया आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में दोपहिया वाहनों की मरम्मत, रेडियो एवं टेलीविजन की मरम्मत, मोटर रिवाइंडिंग, विद्युत ट्रांसफार्मर की मरम्मत, सिंचाई पंप-सेट की मरम्मत, ट्रैक्टर एवं पावर टिलर की मरम्मत, मोबाइल फोन मरम्मत, ब्यूटीशियन कोर्स, फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी, स्क्रीन प्रिंटिंग, घरेलू विद्युत उपकरणों की मरम्मत, कंप्यूटर हार्डवेयर एवं डीटीपी जैसे रोजगारपरक प्रशिक्षण शामिल हैं। सामान्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत विशेष रूप से महिलाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं, जिससे वे स्वरोजगार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।

अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में चमड़ा उद्योग, निर्माण कार्य, आतिथ्य सत्कार (हॉस्पिटैलिटी) तथा स्थानीय आवश्यकताओं एवं बाजार की मांग के अनुरूप अन्य क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है।

यह भी बताया गया कि प्रत्येक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) स्थानीय संसाधनों, उपलब्ध अवसरों तथा उत्पाद एवं सेवाओं की संभावित मांग के आधार पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का चयन करेगा। प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सभी संस्थानों हेतु एक समान मानकीकृत पाठ्यक्रम विकसित किया गया है, जिसे सभी आरएसईटीआई में लागू किया जाएगा। सभी आरएसईटीआई में दो प्रकार के प्रमुख प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। प्रथम, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के सदस्यों के लिए बुनियादी अभिमुखीकरण (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम तथा द्वितीय, सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना एवं वेतनभोगी रोजगार हेतु कौशल विकास कार्यक्रम।

उप मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देशित किया कि प्रत्येक प्रशिक्षण कार्यक्रम में तकनीकी कौशल के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल, व्यक्तित्व विकास, संचार कौशल, वित्तीय साक्षरता, उद्यमिता विकास तथा विपणन संबंधी प्रशिक्षण को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, ताकि प्रशिक्षार्थी आत्मविश्वास के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के क्षेत्र में सफल हो सकें। ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह अभियान मिशन मोड में संचालित किया जाए, जिससे प्रदेश के गांव आर्थिक विकास के नए केंद्र बनें और उत्तर प्रदेश देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हो सके।

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