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कब है शरद पूर्णिमा? जानें खीर रखने का महत्व

कब है शरद पूर्णिमा? जानें खीर रखने का महत्व

24Ghante Online 11 hrs ago

हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा को विशेष फलदायी तिथि माना जाता है। साल 2026 में यह पर्व रविवार, 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। कोजागरी पूर्णिमा के नाम से प्रसिद्ध इस पर्व पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

धार्मिक मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

शरद पूर्णिमा पर रात में जागकर पूजा करने, चंद्रमा के दर्शन करने और खीर का प्रसाद तैयार करने की परंपरा है। दूध और चावल से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे रखा जाता है, ताकि उस पर चंद्रमा की रोशनी पड़े। अगले दिन सुबह इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इस बार इस पर्व पर सर्वार्थ सिद्धि योग और बुध-शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग बनने का भी उल्लेख किया जा रहा है।

क्या है कोजागरी पूर्णिमा का अर्थ?

कोजागरी शब्द संस्कृत के 'को जागर्ति' से निकला है, जिसका अर्थ है 'कौन जाग रहा है?' मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और यह देखती हैं कि कौन उनकी आराधना में जाग रहा है। इसी विश्वास के चलते भक्त रातभर जागरण करते हैं और मां लक्ष्मी से धन, वैभव तथा खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।

खीर को चांदनी में रखने की परंपरा क्यों?

शरद पूर्णिमा पर खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। धार्मिक विश्वास है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृतमयी गुण होते हैं। इसी वजह से खीर को खुले आसमान के नीचे रखा जाता है और बाद में परिवार के लोग इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

इस परंपरा को आरोग्य और अच्छी सेहत से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, चांदनी में रखी खीर के विशेष औषधीय गुणों या सालभर बीमारियों से बचाव के दावों की पुष्टि वैज्ञानिक प्रमाणों से नहीं हुई है। खीर को खुले में रखते समय उसे धूल-मिट्टी और कीड़ों से सुरक्षित रखना भी जरूरी है।

श्रीकृष्ण के महारास से जुड़ा है पर्व

पौराणिक कथाओं में शरद पूर्णिमा की रात को भगवान श्रीकृष्ण के महारास से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इसी रात श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास किया था। इस प्रसंग के कारण यह तिथि कृष्ण भक्तों के लिए भी खास मानी जाती है। कई स्थानों पर इस अवसर पर भजन, कीर्तन और धार्मिक आयोजन होते हैं।

चंद्रमा की रोशनी को लेकर क्या है विश्वास?

ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की चांदनी मन को शांत करने और सकारात्मकता का अनुभव कराने वाली मानी जाती है। इस रात लोग चंद्रमा के दर्शन करते हैं और खुले वातावरण में समय बिताते हैं। यह धार्मिक आस्था का हिस्सा है, इसे किसी विशेष चिकित्सकीय लाभ की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

शरद पूर्णिमा पर पूजा, जागरण, खीर का प्रसाद और कृष्ण महारास की स्मृति पर्व को खास बनाते हैं। भक्त इस अवसर पर मां लक्ष्मी से घर में सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: 24Ghante Online