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Yogi Cabinet: रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ, 22 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरण को मंजूरी

Yogi Cabinet: रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ, 22 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरण को मंजूरी

24Ghante Online 1 week ago

खनऊ, 06 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में जनपद रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना के लिए कृषि विभाग की 22 हेक्टेयर भूमि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई।

यह महाविद्यालय चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत स्थापित किया जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश में कृषि एवं उद्यान शिक्षा के विस्तार को नई गति मिलेगी।

उद्यान महाविद्यालय की स्थापना के लिए जिलाधिकारी रायबरेली द्वारा ग्राम पड़ेरा, परगना एवं तहसील सदर स्थित उपलब्ध भूमि चिन्हित की गई थी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार उपलब्ध 44.888 हेक्टेयर भूमि में से 22 हेक्टेयर भूमि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। इससे रायबरेली सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश में उद्यानिकी शिक्षा, अनुसंधान तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के विकास को नई मजबूती मिलेगी।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अयोध्या, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय बांदा, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ तथा निजी क्षेत्र का सैम हिग्गिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिक एवं विज्ञान विश्वविद्यालय प्रयागराज में संचालित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुशीनगर की स्थापना की जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालयों में उद्यान विभाग संचालित हैं, जहां उद्यान विषयक अध्ययन-अध्यापन का कार्य किया जाता है। इसी क्रम में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस परियोजना पर लगभग 50 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है। महाविद्यालय की स्थापना से प्रदेश में औद्यानिक शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा के नए अवसर प्राप्त होंगे।

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