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पुरुषोत्तम मास विशेष : 16वीं शताब्दी में निर्मित नारायण का अद्भुत मंदिर, जहां विराजते हैं वेंकटरमण स्वामी

पुरुषोत्तम मास विशेष : 16वीं शताब्दी में निर्मित नारायण का अद्भुत मंदिर, जहां विराजते हैं वेंकटरमण स्वामी

5 Dariya News 4 months ago

सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास का खासा धार्मिक महत्व है। इस महीने में भगवान विष्णु की आराधना, पूजा, व्रत, दान और मंदिर दर्शन का विशेष महत्व है। देश-दुनिया में नारायण के कई भव्य मंदिर हैं; इसी कड़ी में आपको आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के ताड़ीपत्री स्थित अद्भुत मंदिर के बारे में बताते हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का तो इतिहास का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है।

यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि अपनी भव्य वास्तुकला और ऐतिहासिक विरासत के कारण भी खास स्थान रखता है। चिंताला वेंकटरमण स्वामी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था और इतिहास के महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक है। भगवान विष्णु के स्वरूप भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित यह मंदिर दक्षिण भारत की प्राचीन मंदिर परंपरा का शानदार उदाहरण है।

माना जाता है कि इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के शासनकाल के दौरान हुआ था। उस समय दक्षिण भारत में कला, स्थापत्य और संस्कृति अपने उत्कर्ष पर थी, और इस मंदिर की संरचना उसी स्वर्णिम युग की झलक दिखाती है। मंदिर में प्रवेश करते ही इसकी विशालता और नक्काशीदार शिल्पकला श्रद्धालुओं और पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है।

मंदिर का ऊंचा गोपुरम दूर से ही दिखाई देता है। इसके स्तंभों, दीवारों और प्रवेश द्वारों पर उकेरी गई मूर्तियां उस दौर के कलाकारों की अद्भुत प्रतिभा का परिचय देती हैं। मंदिर परिसर में कई छोटे-छोटे देवालय भी हैं, जो विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित हैं। मंदिर से जुड़ी लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, यह वही स्थान है जहां भगवान वेंकटेश्वर ने अपने भक्त चिंताला वेंकटरमण को दिव्य दर्शन दिए थे।

इसी घटना की स्मृति में इस मंदिर की स्थापना की गई। समय के साथ यह स्थान श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन गया और दूर-दूर से भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं। इतिहासकारों के अनुसार, विजयनगर साम्राज्य के प्रभाव के दौरान यह मंदिर धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। मंदिर परिसर में स्थित प्रसिद्ध गरुड़ मंडपम का निर्माण वर्ष 1520 के आसपास कराया गया था।

यह मंडप आज भी अपनी भव्यता और कलात्मक सुंदरता के लिए जाना जाता है। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को सामने एक भव्य और ऊंचा गोपुरम दिखाई देता है, जो इसकी वास्तुकला की भव्यता को पेश करता है। गोपुरम के आगे खूबसूरती से निर्मित स्तंभ दिखाई देते हैं और फिर गरुड़ मंडप स्थित है, जिसे ग्रेनाइट पत्थरों से बने पहियों वाले रथ के स्वरूप में तैयार किया गया है।

इसकी संरचना प्रसिद्ध हम्पी के विट्ठल मंदिर के पत्थर के रथ की याद दिलाती है, हालांकि इसका आकार अपेक्षाकृत छोटा है। गरुड़ मंडप के सामने लगभग चालीस स्तंभों वाला विशाल मुख मंडप बना हुआ है। इसके बाद रंग मंडप और मुख्य गर्भगृह स्थित है, जहां भगवान के दर्शन किए जाते हैं। यहां आयोजित होने वाला वार्षिक ब्रह्मोत्सवम सबसे महत्वपूर्ण उत्सव माना जाता है।

सितंबर और अक्टूबर के बीच आयोजित इस पर्व में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया जाता है और भगवान की भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती है। पुरुषोत्तम महीने में भगवान विष्णु के मंदिरों में दर्शन और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में चिंताला वेंकटरमण स्वामी मंदिर एक ऐसा स्थल है, जहां वे आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को भी करीब से देख सकते हैं।

पर्यटन के लिहाज से भी यह क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण है। मंदिर के आसपास कई ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं। ताड़ीपत्री का प्राचीन किला और प्रसिद्ध गांडिकोटा किला पर्यटकों को इतिहास की अनोखी झलक दिखाते हैं। इन स्थलों से आसपास के प्राकृतिक दृश्यों का भी मनमोहक नजारा देखने को मिलता है। मंदिर के आसपास के बाजार स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक मूर्तियों, पारंपरिक रेशमी साड़ियों और हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुओं के लिए भी प्रसिद्ध हैं।

यहां आने वाले पर्यटक धार्मिक यात्रा के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और कला का भी अनुभव कर सकते हैं। आस्था, इतिहास, वास्तुकला और पर्यटन का अद्भुत संगम प्रस्तुत करने वाला चिंताला वेंकटरमण स्वामी मंदिर सुबह 6 बजे से 11 बजे तक और शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक (यदि आप गर्भगृह में प्रवेश करके मुख्य देवता के दर्शन करना चाहते हैं) खुला रहता है।

वहीं, चिंताला वेंकटरमण स्वामी मंदिर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो बेंगलुरु में स्थित है। यहां से सड़क मार्ग के जरिए ताड़ीपत्री पहुंचा जा सकता है। वहीं, सबसे निकट रेलवे स्टेशन अनंतपुर रेलवे स्टेशन है, जहां से टैक्सी या बस के माध्यम से मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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