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सीएम देवेंद्र फडणवीस ने लोगों से साइबर फ्रॉड होने पर 'बिना देरी किए 1930 डायल करने' की अपील की

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने लोगों से साइबर फ्रॉड होने पर 'बिना देरी किए 1930 डायल करने' की अपील की

5 Dariya News 2 weeks ago

हाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा कि कानूनी और व्यावहारिक रूप से 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई चीज नहीं होती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे साइबर अपराधियों की मनोवैज्ञानिक चालों में न फंसें।

महाराष्ट्र साइबर द्वारा आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम में बोलते हुए सीएम फडणवीस ने तेजी से बढ़ते जटिल ऑनलाइन घोटालों के बारे में बात की।

उन्होंने चेतावनी दी कि धोखाधड़ी करने वाले गिरोह अक्सर कानून प्रवर्तन अधिकारियों, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के कर्मचारियों या जजों का रूप धरकर लोगों के डर का फायदा उठाते हैं। वे पीड़ितों को डरा-धमकाकर अपनी बात मनवाने के लिए अक्सर नकली कोर्टरूम सेटअप या वीडियो कॉल पर वर्दी पहने अभिनेताओं का इस्तेमाल करते हैं।

मुख्यमंत्री ने एक बड़ा जागरूकता अभियान शुरू किया, जिसमें 'डिजिटल अरेस्ट' नाम की 42 मिनट की शॉर्ट फिल्म और '1930 महाराष्ट्र साइबर एंथम' जारी किया गया। इस मल्टीमीडिया अभियान में छोटी क्लिप और मशहूर हस्तियों वाले सोशल मीडिया रील्स शामिल हैं, और इसका मकसद राज्य भर के घरों तक पहुंचना है। फडणवीस ने जोर देकर कहा कि साइबर धोखाधड़ी की घटना के तुरंत बाद का 'गोल्डन आवर' (महत्वपूर्ण समय) बहुत जरूरी होता है।

इस समय के भीतर अपराध की रिपोर्ट करने से धोखाधड़ी की गई रकम को फ्रीज करने या वापस पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। रिपोर्ट करने में तीन से पंद्रह दिन की देरी होने पर अपराधी कई खातों में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे रकम वापस पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए, उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी का शक होते ही नागरिकों को बिना देरी किए 1930 डायल करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन पोर्टल रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं, साइबर खतरों के प्रति आम लोगों की असुरक्षा भी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस टेक्नोलॉजी को आधुनिक बनाने के साथ-साथ, बड़े पैमाने पर लोगों में जागरूकता फैलाना ही सबसे मजबूत बचाव है।

स्कैमर्स अक्सर ऐसे हथकंडे अपनाते हैं जैसे पार्सल में ड्रग्स मिलने का दावा करना, ओटीपी फ्रॉड, फर्जी फोन कॉल और कानून लागू करने वाले अधिकारियों का रूप धरकर बात करना। उन्होंने कहा कि वर्दी पहने लोगों या स्क्रीन पर कोर्टरूम जैसा माहौल देखकर नागरिक डर जाते हैं और उनकी बात मान लेते हैं। एआई से चलने वाले वॉइस क्लोनिंग, डीपफेक और हेरफेर किए गए मीडिया से बढ़ते खतरों को मानते हुए मुख्यमंत्री ने इन जोखिमों को कम करने के लिए 'महाराष्ट्र साइबर' के सक्रिय रुख की तारीफ की।

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