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अपराधों हेतु जिम्मेदार प्रशासक, पुलिस आयुक्त को जबरन छुट्टी पर भेजें

अपराधों हेतु जिम्मेदार प्रशासक, पुलिस आयुक्त को जबरन छुट्टी पर भेजें

शिवाजीनगर, 30 मई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

महाराष्ट्र की अपराधियों की राजधानी के रूप में पुणे की पहचान बनती जा रही है और इसके लिए पूरी तरह से पुणे के प्रशासक तथा पुलिस विभाग जिम्मेदार हैं.

पुलिस आयुक्त को अनिवार्य अवकाश पर भेजा जाना चाहिए, ऐसी मांग राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की कार्याध्यक्ष एवं सांसद सुप्रिया सुले ने शनिवार को की. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से पुणे में बढ़ रहे अपराध सरकार की विफलता है. पुणे में बढ़ते अपराधों की पृष्ठभूमि में सांसद सुप्रिया सुले ने शनिवार को मोदीबाग में पत्रकारों से संवाद किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सप्ताह पूर्व लीक हुआ नीट परीक्षा प्रश्नपत्र, बढ़ती महंगाई तथा राज्य में महिलाओं और अल्पवयस्क बालिकाओं पर बढ़ते अत्याचारों की घटनाओं के लिए सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है.

केंद्र सरकार ने देश में अपराध संबंधी आंकड़े प्रकाशित किए हैं. इनमें देश में क्राइम्स के मामले में पुणे का स्थान पांचवां तथा महाराष्ट्र में पहला बताया गया है. कुछ दिन पहले क्राइम्स में नागपुर प्रथम स्थान पर था, किंतु अब पुणे शहर पहले स्थान पर पहुंच गया है. यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बात है.

जहरीली शराब पीने से 18 से अधिक नागरिकों की मृत्यु हो गई. यह अत्यंत गंभीर घटना है. उन्होंने कहा, अब तक पुणे शहर को शिक्षा की नगरी के रूप में जाना जाता था. यहां अनेक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान होने के कारण राज्य, देश तथा विदेशों से भी विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने आते हैं.

पिछले कुछ महीनों से शहर में कानून एवं व्यवस्था की बिगड़ी हुई स्थिति को देखते हुए पुणे की पहचान क्राइम की राजधानी के रूप में होने लगी है. इसके लिए शहर के प्रशासक तथा पुलिस विभाग का कार्यकलाप जिम्मेदार है. मुख्यमंत्री को तत्काल पुलिस आयुक्त को अनिवार्य अवकाश पर भेजना चाहिए, ऐसी मांग सांसद सुप्रिया सुले ने की. जहरीली शराब प्रकरण में पुलिस तंत्र तथा उत्पाद शुल्क विभाग, दोनों की जांच होनी चाहिए.

केवल अधिकारियों को निलंबित करने से क्या होगा. पुणे पुलिस और महाराष्ट्र सरकार क्या कर रही है, इसका उत्तर सरकार को देना चाहिए. पुणे के पुलिस आयुक्त असफल साबित हुए हैं. उन्हें इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए.

कांग्रेसमुक्त या कांग्रेसयुक्त भाजपा देश को कांग्रेसमुक्त बनाने की घोषणा केंद्र की भारतीय जनता पार्टी ने की थी. किंतु वर्तमान में भाजपा में नेताओं की संख्या देखकर यह समझ में नहीं आता कि सपना कांग्रेसमुक्त भारत का था या कांग्रेसयुक्त भाजपा का. राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता एवं पूर्व राज्यमंत्री प्राजक्त तनपुरे के भाजपा में प्रवेश पर भी सांसद सुप्रिया सुले ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, हर व्यक्ति की कुछ कठिनाइयां होती हैं.

लेकिन हर बात कैमरे के सामने नहीं कही जाती. उन्होंने कहा कि प्राजक्त तनपुरे उनसे मिले थे और उन्हें उनकी शुभकामनाएं हैं. अहिल्यानगर जिले में राम शिंदे को छोड़कर अन्य लगभग सभी नेतृत्व कांग्रेस से जुड़े रहे हैं. लोगों को परिवर्तन चाहिए था, लेकिन क्या बदला. जो 100 परिवार कल कांग्रेस में थे, वे आज भाजपा में चले गए्‌‍. आखिर परिवर्तन क्या हुआ, ऐसा व्यंग्यात्मक प्रश्न सुप्रिया सुले ने किया.

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