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सिम कार्ड के लिए बायाेमेट्रिक पहचान हाेगी जरूरी

सिम कार्ड के लिए बायाेमेट्रिक पहचान हाेगी जरूरी

देश में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम काेर्ट में बड़ा एक्शन प्लान पेश किया है. गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने अपनी विस्तृत रिपाेर्ट में बताया कि इस साइबर अपराध से निपटने के लिए टेलीकाॅम विभाग, आरबीआई, टेक कंपनियाें और जांच एजेंसियाें के साथ मिलकर बहु-स्तरीय कार्रवाई की जा रही है.

सुप्रीम काेर्ट के निर्देश पर दायर इस रिपाेर्ट में बताया गया कि वाट्सएप ने पिछले 12 हफ्ताें में डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े 9,400 अकाउंट्स बैन कए हैं. इसके अलावा प्लेटफाॅर्म अब ऐसे अकाउंट्स की पहचान कर रहा है, जाे पुलिस या सरकारी लाेगाे का दुरुपयाेग करते हैं. रिपाेर्ट के मुताबिक, वाॅट्सएप जल्द ही ऐसे फीचर्स लाने जा रहा है जिससे यूजर्स काे चेतावनी मिलेगी अगर काॅल किसी नए या संदिग्ध अकाउंट से आ रही हाे.

साथ ही, संदिग्ध काॅलर्स की प्राेफाइल फाेटाे काे ऑटाेमैटिक छिपाने की याेजना भी है ताकि ठग अधिकार का झूठा प्रभाव न बना सकें.दूरसंचार विभाग और टेलीकाॅम कंपनियाें ने मिलकर फर्जी सिम कार्ड्स पर तेजी से कार्रवाई करने का प्लान तैयार किया है. अब लक्ष्य है कि किसी भी संदिग्ध सिम काे पहचान के दाे से तीन घंटे के भीतर ब्लाॅक किया जाए.सीबीआई ने तय किया है कि 10 कराेड़ रुपये से अधिक की ठगी वाले मामलाें की जांच वह अपने हाथ में लेगी.फिलहाल तीन बड़े केस दाेबारा दर्ज किए गए हैं. जिनमें दिल्ली का एक मामला शामिल है, जहां एक व्यक्ति से 22.92 कराेड़ रुपये की ठगी हुई.सरकार एक नया बायाेमेट्रिक पहचान सत्यापन प्रणाली (बीआईवीएस) लागू करने की याेजना बना रही है, जिससे देशभर में सिम जारी हाेने की रियलटाइम निगरानी हाे सके.

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