उन्होंने बताया कि मुड़पार गांव में एक निजी सुअर पालक के यहां पिछले कुछ दिनों से सुअरों की मृत्यु हो रही थी और जब सुअर पालक ने इसकी सूचना जिला पशुपालन विभाग को दी, तब दो अप्रैल को पशुपालन विभाग सुअर फार्म पहुंचा और नमूना जांच के लिए भोपाल भेजा गया।
अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को रिपोर्ट में सुअरों में ASF की पुष्टि होने के बाद पशुपालन विभाग द्वारा 83 सुअरों को इंजेक्शन देकर मार दिया गया तथा संक्रमण रोकने के लिए सुअरों के शवों को नियमों के अनुसार दफना दिया गया है।
दुर्ग में पशु चिकित्सा सेवाओं के उप संचालक डॉक्टर वसीम शम्स ने बताया कि ASF एक ऐसी बीमारी है जिसका ना तो कोई इलाज है और ना ही अभी तक इसकी कोई वैक्सिन बनी है, इसलिए भारत सरकार के दिशानिर्देश के तहत वैज्ञानिक पद्धति से सुअरों को मारकर दफनाने का प्रावधान है।
डॉक्टर शम्स ने बताया कि यह बीमारी केवल सुअरों से सुअरों तक ही फैलती है, अन्य किसी जानवर या इंसानो में इसका असर नहीं होता है। उन्होंने बताया कि एक किलोमीटर क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन बनाया गया है।

