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टाटा की लुटिया डुबो रहे नए कारोबार. ग्रुप का घाटा बढ़कर ₹29,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना

टाटा की लुटिया डुबो रहे नए कारोबार. ग्रुप का घाटा बढ़कर ₹29,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना

आज ख़बर 4 days ago

9 महीनों में ही ₹21,700 करोड़ पारएक खबर के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में ही कुल घाटा ₹21,700 करोड़ तक पहुंच चुका है, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2025 में यह ₹16,550 करोड़ था।

इससे साफ है कि नुकसान का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इस बढ़ते घाटे में सबसे बड़ा हाथ एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और तेजस नेटवर्क जैसे नए बिजनेस से आ रहा है।


नोएल टाटा की चिंता, बोर्ड स्तर पर बढ़ा दबाव

नोएल टाटा (Noel Tata) ने इन नए प्रोजेक्ट्स के बढ़ते घाटे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। यही कारण रहा कि फरवरी में हुई बोर्ड बैठक में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को मंजूरी देने का फैसला टाल दिया गया। अब उम्मीद है कि जून की बैठक में घाटा कम करने की ठोस रणनीति पेश की जाएगी।


टाटा डिजिटल बना सबसे बड़ी चिंता

टाटा ग्रुप का डिजिटल कारोबार, जिसमें बिग बॉस्केट, Tata 1mg, क्रोमा और टाटा क्लिक जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं, अभी तक फायदे में नहीं आ पाया है। FY26 में इस यूनिट का घाटा ₹5,000 करोड़ से ज्यादा रहने का अनुमान है, जबकि 9 महीनों में ही ₹3,750 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर ग्रोथ, लीडरशिप में बदलाव और प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले धीमी रणनीति इसके पीछे मुख्य कारण हैं।


एयर इंडिया पर सबसे बड़ा बोझ

घाटे का सबसे बड़ा हिस्सा एयर इंडिया से आ रहा है। वित्त वर्ष 2026 में इसका नुकसान ₹20,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान से कई गुना अधिक है। तेल की ऊंची कीमतें, पाकिस्तान एयरस्पेस का बंद होना और ग्लोबल टेंशन जैसे बाहरी कारणों ने कंपनी की लागत बढ़ा दी है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सेवा सुधार की गति अभी भी अपेक्षा से धीमी है।


अन्य बिजनेस भी दबाव में

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सेमीकंडक्टर कारोबार में FY26 में करीब ₹3,000 करोड़ के घाटे का अनुमान है। वहीं तेजस नेटवर्क्स, जो FY25 में मुनाफे में थी, अब FY26 में ₹1,000 करोड़ के नुकसान में जा सकती है। यह दिखाता है कि समूह के कई नए निवेश अभी शुरुआती चरण में हैं और उन्हें स्थिर होने में समय लगेगा।


क्या है आगे की चुनौती?

टाटा ग्रुप के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब इन नए व्यवसायों को मुनाफे की राह पर लाना है। लगातार बढ़ता घाटा निवेशकों और बोर्ड दोनों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर जल्द ही रणनीतिक बदलाव नहीं किए गए, तो यह घाटा आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है।

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