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उज्जैन वह स्थान है जहां अध्यात्म और विज्ञान के बीच की दूरी समाप्त हो जाती है : केंद्रीय मंत्री प्रधान

उज्जैन वह स्थान है जहां अध्यात्म और विज्ञान के बीच की दूरी समाप्त हो जाती है : केंद्रीय मंत्री प्रधान

आज ख़बर 6 months ago

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को उज्जैन में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पधारे विद्वानों और विशेषज्ञों का स्वागत अभिनंदन किया।

केंद्रीय मंत्री प्रधान ने विज्ञान और आध्यात्मिकता के अटूट संबंध पर विशेष बल दिया।

उन्होंने कहा कि विज्ञान आध्यात्मिकता के बिना अधूरा है और इसका सबसे सटीक उदाहरण स्वयं उज्जैन नगरी और महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं में दिखाई देता है। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने महाकाल मंदिर के एक वैज्ञानिक अनुष्ठान का उल्लेख करते हुए बताया कि वैशाख मास के पहले दिन से भगवान शिव के ऊपर मटके से निरंतर जल की धारा प्रवाहित करने की व्यवस्था केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि ग्रीष्मकाल की चुनौतियों का एक वैज्ञानिक समाधान और पर्यावरणीय प्रबंधन है। यह दर्शाता है कि हमारा समाज सदियों से काल गणना और प्रकृति के बदलावों के अनुसार अपनी जीवनशैली को ढालने की वैज्ञानिक समझ रखता था। भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व और संतुलित जीवन प्रवाह हमेशा से केंद्र में रहा है।

केंद्रीय मंत्री प्रधान ने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों का जिक्र करते हुए 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने जोर दिया कि हमें अपनी शिक्षा पद्धति को केवल रटने की पुरानी परिपाटी से निकालकर सृजनशीलता डिजाइन थिंकिंग और क्रिटिकल थिंकिंग की ओर ले जाना होगा। आज का युग एआई और कंप्यूटेशनल थिंकिंग का है भारत के विद्यार्थी वैश्विक स्तर पर इस दौड़ में पीछे न रहें इसके लिए स्कूली स्तर पर ही एआई जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने स्पष्ट किया कि ज्ञान पर किसी भाषा का एकाधिकार नहीं हो सकता इसलिए शिक्षा को भारतीय भाषाओं और लोक-संस्कृतियों के साथ जोड़ा जा रहा है जिससे हर विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरलता से समझ सके।

केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि उज्जैन वह स्थान है जहाँ से कर्क रेखा गुजरती है और यहीं से प्राचीन काल में दुनिया की काल गणना होती थी इसलिए अब समय आ गया है कि हम 'ग्रीनविच मीन टाइम के स्थान पर 'महाकाल स्टैंडर्ड टाइम की तार्किक स्थापना करें। उन्होंने कहा कि आधुनिक एआई उपकरण भी यह स्वीकार करते हैं कि काल गणना का मूल केंद्र उज्जैन के आसपास का क्षेत्र है अतः हमें अपने वैज्ञानिक स्वाभिमान को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करना होगा और यह इस विमर्श का मुख्य उद्देश्य है।

केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि भारत आज अंतरिक्ष ड्रोन और सूचना प्रौद्योगिकी में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले दो दशकों में भारत न केवल अपनी आवश्यकताओं को पूरा करेगा बल्कि 'वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ पूरे विश्व की पर्यावरणीय और आर्थिक चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान भी प्रदान करेगा। उज्जैन में 'विज्ञान केंद्र और 'तारामंडल का सुदृढ़ीकरण इसी दिशा में एक बड़ा कदम है जिससे आने वाली पीढ़ी वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ सके।

प्रख्यात चिंतक एवं लेखक सुरेश सोनी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में काल (समय) की अवधारणा अत्यंत गहन और वैज्ञानिक है। भारतीय कालगणना खगोलीय पिंडों की गति ऋतु चक्र और प्रकृति के नियमों से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य की समग्र प्रगति के लिए विज्ञान एवं तकनीक कला अध्यात्म सामाजिकता और सामाजिक अर्थशास्त्र के बीच संतुलित समन्वय आवश्यक है। उज्जैन में स्थापित कालयंत्र इस प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से भारतीय वैज्ञानिक विरासत को समझने प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने और विज्ञान को मानवीय मूल्यों से जोड़ने का आह्वान किया।

नीति आयोग के सदस्य एवं प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. वी. के. सारस्वत ने कहा कि उज्जैन प्राचीन काल से कालगणना और खगोल विज्ञान का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन स्वच्छ ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान नवाचार और स्वदेशी अनुसंधान से ही संभव है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता पर बल देते हुए एआई क्वांटम तकनीक और सेमीकंडक्टर जैसे डीप टेक क्षेत्रों में अनुसंधान बढ़ाने R&D में निवेश विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं की क्षमता से भारत 2047 तक तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनेगा।

विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री शिव कुमार शर्मा ने कहा कि यह आयोजन विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा में नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। शिक्षा केवल जानकारी का माध्यम नहीं बल्कि समाज को परिवर्तनकारी दृष्टि देने का साधन है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लर्निंग बाइ डूइंग सिद्धांत के तहत विद्यार्थी विज्ञान मंथन 2026-27 का शुभारंभ किया गया जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति गौरव भाव जगाते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार क्षमता का विकास करना है।

राष्ट्रीय समन्वयक आईकेएस नई दिल्ली डॉ. गांती एस. मूर्ति ने कहा कि यह सम्मेलन अतीत के ज्ञान के संरक्षण नवाचार के सृजन और ज्ञान के निरंतर प्रवाह पर आधारित है। सम्मेलन में बच्चों के लिए भौतिकी प्रशिक्षण विशेष सत्र और प्रदर्शनी के माध्यम से खगोल विज्ञान एवं आधुनिक नवाचारों को प्रस्तुत किया गया है।

महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम

अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का मूल ध्येय भारत की उस समृद्ध वैज्ञानिक थाती को आधुनिक जगत के साथ एकाकार करना है जो सदियों से हमारी पहचान रही है। इस युगांतरकारी आयोजन का सबसे प्रमुख संकल्प उज्जैन को 'विश्व के मेरिडियन शून्य रेखा के रूप में पुनः प्रतिष्ठित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन के अनुरूप यह सम्मेलन 'विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने की दिशा में 'स्पेस इकोनॉमी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के नए द्वार खोलेगा। यहाँ खगोल विज्ञान और ब्रह्मांड विज्ञान की आधुनिक प्रगति का प्राचीन भारतीय काल-ज्ञान के साथ अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। सम्मेलन का एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य वेदांग और सिद्धांत ज्योतिष के कालजयी सूत्रों को आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर कसकर पंचांग पद्धतियों में आने वाली सूक्ष्म त्रुटियों का वैज्ञानिक परिमार्जन करना है।

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