नई दिल्ली। 4 अप्रैल 2026 को ईरान के ऊपर एक अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को मार गिराया गया था। इस घटना के बाद शुरू हुआ हाई-रिस्क रेस्क्यू ऑपरेशन अब सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। विमान में सवार दोनों क्रू मेंबर्स में से एक पायलट को तुरंत बचा लिया गया था, जबकि दूसरे एयरमैन (हथियार सिस्टम ऑपरेटर) को ढूंढने और निकालने में काफी समय लगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे ऑपरेशन को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें आशंका थी कि कहीं यह पूरा मामला ईरान की साजिश न हो। ट्रंप के मुताबिक, एयरमैन के eject होने के बाद रेडियो पर आया एक छोटा सा संदेश - "God is good" - उन्हें असामान्य लगा। इससे शक हुआ कि कहीं ईरानी सेना ने उसे पकड़कर अमेरिकी रेस्क्यू टीम को जाल में फंसाने की कोशिश तो नहीं की। हालांकि बाद में पुष्टि हुई कि वह संदेश खुद एयरमैन ने ही भेजा था। ट्रंप ने कहा कि एयरमैन धार्मिक स्वभाव का है, इसलिए उसने ऐसा संदेश दिया।
पहाड़ी इलाके में छिपा था एयरमैन
जानकारी के अनुसार, एयरमैन ईरान के एक पहाड़ी क्षेत्र में चट्टानों के बीच छिपा हुआ था। उसे ढूंढने के लिए ईरानी सुरक्षाबल और स्थानीय लोग लगातार तलाशी अभियान चला रहे थे। यहां तक कि ईरान की ओर से उसे पकड़वाने के लिए इनाम की भी घोषणा की गई थी। अमेरिकी सेना ने अत्याधुनिक तकनीक की मदद से उसकी लोकेशन ट्रैक की और रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया।
जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन
ट्रंप ने कहा कि एक सैनिक को बचाने के लिए इतने बड़े स्तर पर ऑपरेशन चलाना आसान फैसला नहीं था। उन्होंने बताया कि इस मिशन में कई सैनिकों और विमानों को खतरे में डालना पड़ा। उनके मुताबिक, "हर देश ऐसा कदम नहीं उठाता, लेकिन अमेरिका अपने सैनिकों को पीछे नहीं छोड़ता।"
इजरायल की भी रही भूमिका
इस ऑपरेशन में इजरायल ने भी सीमित सहयोग दिया। ट्रंप के अनुसार, इजरायल ने इलाके से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की और कुछ रणनीतिक हमले कर ईरानी बलों को दूर रखने में मदद की।
SEAL टीम ने संभाला मोर्चा
एयरमैन को सुरक्षित बाहर निकालने की जिम्मेदारी अमेरिकी नेवी की विशेष SEAL टीम ने निभाई। यही टीम पहले भी कई बड़े मिशन अंजाम दे चुकी है। ऑपरेशन के दौरान दो C-130 विमान तकनीकी कारणों से फंस गए थे, जिन्हें बाद में नष्ट कर दिया गया ताकि वे दुश्मन के हाथ न लगें।
रेस्क्यू किए गए एयरमैन को चोटें आई हैं, लेकिन उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, "हम अपने किसी भी सैनिक को दुश्मन के पीछे नहीं छोड़ते।"

