काठमांडू: नेपाल में लगातार हो रही बारिश के बीच एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। देश की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से ऊपर जा रहा है। बुधवार (2 सितंबर) सुबह तक सुन कोशी, बूढ़ी गंडकी और महाकाली नदी का पानी खतरे के निशान को पार कर चुका था।
हालात को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों के मुताबिक, मध्य, पश्चिमी और पूर्वी नेपाल के कई हिस्सों में बारिश का असर ज्यादा देखा जा रहा है। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी और जलस्रोतों के आसपास जाने से बचें और पानी का स्तर बढ़ने की स्थिति में तत्काल सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं।
मार्स्यांगदी नदी का जलस्तर भी बढ़ा
नेपाल के जल एवं मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि लामजुंग जिले में मार्स्यांगदी नदी का जलस्तर मंगलवार रात करीब 11:15 बजे भुकुंडेबेसी निगरानी केंद्र पर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। विभाग के अनुसार नदी का जलस्तर अभी भी बढ़ रहा है, जिससे आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने भी निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने को कहा है। प्रशासन की ओर से नदी तट के आसपास रहने वाले परिवारों को पानी बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है।
नेपाल में सक्रिय है मानसून
नेपाल के कई हिस्सों में इस समय मानसून सक्रिय है। राजधानी काठमांडू समेत विभिन्न इलाकों में लगातार बारिश का दौर जारी है। बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ ही निचले क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां हालात पर लगातार नजर रख रही हैं। लोगों से मौसम और प्रशासन की ओर से जारी होने वाली चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है।
बाढ़ त्रासदी में 1,100 से ज्यादा शव बरामद
इस बीच नेपाल में हालिया बाढ़ और आपदा के बाद राहत एवं बचाव अभियान भी जारी है। नेपाल पुलिस के आंकड़ों के अनुसार चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनाहूं से 38 शव बरामद होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक अब तक 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि 95 शव उनके परिजनों को सौंपे जा चुके हैं। बारिश और बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन के सामने अब राहत एवं बचाव कार्य को तेज रखने के साथ-साथ संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की चुनौती है।

