Ghaziabad News(आज समाज नेटवर्क) गाजियाबाद। गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 5.08 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की पूरी रकम फ्रीज कराकर बड़ी सफलता हासिल की है।
पुलिस का कहना है कि समय रहते शिकायत दर्ज होने से पूरी धनराशि सुरक्षित कराई जा सकी।
साइबर अपराध के मामलों में शुरुआती समय को माना जाता है 'गोल्डन आवर'
पुलिस के अनुसार इंदिरापुरम थाना क्षेत्र निवासी राज कपूर ने 2 जुलाई, 2026 की रात करीब 11:45 बजे 5.08 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की सूचना दी। शिकायत मिलते ही साइबर क्राइम थाना सक्रिय हो गया और लगातार कार्रवाई करते हुए रात में करीब 3 बजे तक ठगी की गई 100 प्रतिशत राशि फ्रीज करा दी। पुलिस ने बताया कि साइबर अपराध के मामलों में शुरुआती समय को 'गोल्डन आवर' माना जाता है। यदि पीड़ित तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराता है तो ठगी की गई राशि को फ्रीज या होल्ड कराने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद में पुलिस आयुक्त के निर्देशन में थाना साइबर क्राइम के साथ-साथ सभी थानों में 24×7 साइबर हेल्प डेस्क संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा कमिश्नरेट के तीनों जोनों में अलग-अलग जोनल साइबर सेल बनाई गई हैं, जो साइबर मामलों की निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करती हैं।साइबर अपराधों में बेहतर समन्वय के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), नई दिल्ली में गाजियाबाद पुलिस के दो उपनिरीक्षकों की तैनाती भी की गई है, ताकि विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बनाकर कार्रवाई तेज की जा सके।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी साइबर ठगी का शिकार होने पर बिना देर किए 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, उतनी ही अधिक संभावना ठगी की रकम वापस मिलने की रहेगी।
आवेदन संबंधित पुलिस अधिकारी तक पहुंचने के बाद जांच कर नियमानुसार की जाती है कार्रवाई
पुलिस ने यह भी बताया कि आई4सी के मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) के तहत 50 हजार रुपये तक की फ्रीज धनराशि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने पर बिना न्यायालय के आदेश के पीड़ित को वापस कराई जा सकती है। वहीं ग्रीवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म ( जीआरएम) के माध्यम से ऐसे खाताधारक, जिनके खाते में साइबर ठगी की राशि आने के कारण होल्ड या फ्रीज लगा है, वे अपने बैंक के माध्यम से इसे हटाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन संबंधित पुलिस अधिकारी तक पहुंचने के बाद जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।

