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Gobar Tax: पाकिस्तान में गोबर टैक्स लगाने की तैयारी, हर पशु पर रोजाना 30 रुपए वसूलेगी सरकार

Gobar Tax: पाकिस्तान में गोबर टैक्स लगाने की तैयारी, हर पशु पर रोजाना 30 रुपए वसूलेगी सरकार

सुथरा पंजाब बायोगैस प्रोग्राम का हिस्सा बताई जा रही योजनाGobar Tax, (आज समाज) इस्लामाबाद: पाकिस्तान में सरकार पशुपालन से जुड़े लोगों पर नया टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है, जिसे अनौपचारिक रूप से गोबर टैक्स कहा जा रहा है।

इस प्रस्ताव के तहत गाय और भैंस जैसे पालतू पशुओं पर प्रतिदिन लगभग 30 रुपए तक शुल्क वसूला जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार का मानना है कि इस कदम से अतिरिक्त राजस्व जुटाया जा सकेगा और स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां बड़ी संख्या में लोग पशुपालन से जुड़े हैं, वहां यह टैक्स व्यापक रूप से लागू हो सकता है। मरियम नवाज की सरकार इस कदम को ग्रीन एनर्जी के रूप में पेश कर रही है। यह योजना सुथरा पंजाब बायोगैस प्रोग्राम का हिस्सा बताई जा रही है। यह प्रोग्राम दिसंबर 2024 में पंजाब राज्य में शुरू किया गया था। इसका मकसद कचरे को साफ करना और उससे बायोगैस बनाकर ऊर्जा तैयार करना है।

विपक्ष ने सरकार के फैसले की आलोचना की

वहीं विपक्षी दलों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना कर इसे गोबर टैक्स का नाम दिया है। उनका कहना है कि यह कदम दिखाता है कि सरकार आर्थिक दबाव में है और अब नए-नए तरीकों से पैसा जुटाने की कोशिश कर रही है। विपक्ष ने दावा किया कि ग्रीन एनर्जी का नाम बस दिखावा है। असली कहानी कुछ और है। सरकार का फैसला पहले से महंगाई और महंगे चारे से जूझ रहे किसानों से जबरन पैसा निकालने का तरीका है।

50 लाख गाय-भैंसों पर लग सकती फीस

सरकार ने इस फीस को लागू करने के लिए राज्य की करीब 168 कैटल कॉलोनियों को चिन्हित किया है। इन कॉलोनियों की लगभग 50 लाख गाय-भैंसों पर यह फीस लग सकती है। इस नई योजना के तहत पशुपालकों से हर पशु के हिसाब से रोजाना शुल्क लिया जाएगा। पहले चरण में लाहौर की दो प्रमुख डेयरी कॉलोनियों हरबंसपुरा और गुज्जरपुरा से शुरू होगा। बाद में पूरे पंजाब में फैलाया जाएगा।

पर्यावरण बचाने का संदेश

सरकार का कहना है कि इस पैसे का इस्तेमाल गोबर इकट्ठा करने, कचरा मैनेजमेंट और बायोगैस प्लांट चलाने में किया जाएगा, ताकि पर्यावरण को भी फायदा हो। इतनी ज्यादा गाय-भैंसों का रोजाना कितना गोबर निकल रहा है, इसे ठीक-ठीक नापना लगभग नामुमकिन है। इसी वजह से सरकार ने प्रति पशु तय दर से फीस वसूली का मॉडल अपनाने का फैसला किया है। चाहे गाय या भैंस ज्यादा गोबर दे या कम मालिक को हर पशु के हिसाब से रोज एक तय फीस देनी होगी।

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