Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
Hariyali Teej 2026: विवाह के बाद बेटी क्यों मायके में मनाती है पहली तीज? राधा रानी से है संबंध

Hariyali Teej 2026: विवाह के बाद बेटी क्यों मायके में मनाती है पहली तीज? राधा रानी से है संबंध

सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाई जाती है हरियाली तीजHariyali Teej 2026, (आज समाज), नई दिल्ली: सनातन धर्म में तीज का व्रत बहुत विशेष और महत्वपूर्ण माना जाता है। सावन में हरियाली तीज मनाई जाती है।

हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन हरियाली तीज का व्रत रखा जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त के दिन रखा जाएगा। ये व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत खास होता है। इस दिन व्रत रखने और शिव जी व माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने पर सुहागिनों को अंखड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है। पति की आयु बढ़ती है।

कुंवारी कन्याएं भी रखती हैं व्रत

यही नहीं हरियाली तीज का व्रत कुंवारी कन्याएं भी रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है। इस पर्व का महत्व नवविवाहित बेटियों के लिए बहुत बढ़ जाता है और वो इस पर्व बहुत ही खास तरह से मनाती हैं। प्राचीन परंपराओं के अनुसार, नवविवाहित बेटी अपनी पहली हरयाली तीज अपने मायके में मनाती है। आइए जानते हैं इस परंपरा के पीछे की धार्मिक वजह।

मायके में मनाती हैं तीज

भारतीय संस्कृति कहती है कि लड़की का मायका उसके जीवन में विशेष स्थान रखता है, क्योंकि वहीं वो अपने बचपन से लेकर विवाह तक का समय बिताती है। मायके से लड़की का भावानात्मक जुड़ाव बहुत अधिक होता है। जब बेटी पहली बार तीज मनाती है, तो उसको मायके की याद न आए इसलिए वो इस दौरान मायके में ही रहती है।

'सिंधारा' देने की परंपरा

नवविवाहित बेटी को मायके के लोग सम्मानपूर्वक घर लाते हैं और उसे उपहार में श्रृंगार की चीजें, नए कपड़े, घेवर, मिठाइयां और गहने देते हैं। इस परंपरा को 'सिंधारा' या 'सिंजारा' कहते हैं। ये सिर्फ एक पंरपरा भर नहीं, बल्कि मायके के लोगों का आशीर्वाद होता है।

राधा रानी तीज पर आती हैं मायके

हरियाली तीज पर बरसाना में राधा रानी और श्रीकृष्ण का झूलन महोत्सव मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ये वो दिन होता है, जब राधा रानी का अपनी ससुराल नंदगांव से अपने मायके बरसाना में आगमन होता है। राधा रानी के हरियाली तीज पर मायके आने की परंपरा का अनुसरण करते हुए ही नवविवाहित बेटियां मायके आती हैं।

शिव जी ने देवी पार्वती को अपनाया था

सावन में आने वाली हरियाली तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन से माना जाता है। शिवपुराण में इसका उल्लेख विस्तार पूर्वक मिलता है। मान्यता है कि भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तप किया था। सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन यानी हरियाली तीज पर महादेव ने माता की तपस्या से प्रसन्न होकर उनको अपनाया था।

कब हैं हरियाली तीज

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त 2026 को शाम 06 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी और 15 अगस्त 2026 को शाम 05 बजकर 28 मिनट पर इसका समापन हो जाएगा। उदया तिथि के अनुसार, पर्व मनाने की परंपरा की वजह से हरियाली तीज का व्रत और पूजा 15 अगस्त 2026, शनिवार को की जाएगी।

पूजा का शुभ मुहूर्त

इस साल हरियाली तीज के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 29 मिनट पर शुरू होगा और ये सुबह 09 बजकर 08 मिनट तक रहने वाला है।

हरतालिका और हरियाली तीज में अंतर

  • तिथि का अंतर: हरियाली तीज का व्रत हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन रखा जाता है। वहीं हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है।

हरियाली तीज की परंपरा

हरियाली तीज खासतौर पर उत्तर भारत के राज्यों-राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा में धूमधाम से मनाई जाती है। इसे श्रृंगार तीज भी कहा जाता है। इस दिन महिलाएं हरे वस्त्र पहनती हैं। हाथों में मेंहदी लगाकर, झूला झूलती हैं और पारंपरिक लोकगीग गाती हैं।

हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है निर्जला

हरतालिका तीज का व्रत कठिन व्रतों में शामिल है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध शिव जी को पाने के लिए जंगल में जाकर कठोर तपस्या की। साथ ही निर्जला उपवास रखा था। माता पार्वती से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। ये व्रत सुहागिन महिलाएं निर्जला रखती हैं।

हरियाली और हरतालिका तीज में न करें गलतियां

  • हरियाली और हरतालिका तीज की पूजा में माता पार्वती और भगवान शिव को सुहाग की सामग्री, बेलपत्र, अक्षत, फूल, धूप, दीप, फल और नैवेद्य चढ़ाएं जाते हैं, इसलिए पूजा में अधूरी सामग्री न रखें।
  • इस दिनों व्रतों में मन, वाणी और व्यवहार में भी संयम रखें।
  • व्रत का संकल्प लिया है, तो यथासंभव उसे विधि-विधान से पूरा करने का प्रयास करें। व्रत को बीच में न छोड़ें।
  • हरियाली और हरतालिका तीज की पूजा कथा और आरती के बिना अधूरी मानी जाती है। पूजा में व्रत कथा पढ़ें।
  • तामसिक चीजों का सेवन भूलकर भी न करें।

ये भी पढ़ें: सावन में ये 5 पवित्र व्रत रखने से दूर होंगे दुख-दर्द, मिलेगी सुख-समृद्धि

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Aaj Samaaj