हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भारत के सबसे बड़े और सबसे पवित्र धार्मिक आयोजनों में गिनी जाती हैJagannath Rath Yatra, (आज समाज), नई दिल्ली: सनातन परंपरा में वैसे तो सालभर कई धार्मिक उत्सव और यात्राएं निकाली जाती हैं, लेकिन ओडिशा के पुरी में होने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का वैभव और महत्व सबसे अलग है।
यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि आस्था, समर्पण और पौराणिक रहस्यों का एक ऐसा समागम है, जिसका जिक्र हमारे प्राचीन ग्रंथों में बेहद विस्तार से मिलता है।
स्कंद पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और ब्रह्म पुराण जैसे महान ग्रंथों में इस रथयात्रा को मोक्ष का द्वार बताया गया है। आइए जानते हैं कि आखिर इन पुराणों में जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर क्या रहस्य बताए गए हैं और क्यों इसका महत्व इतना अलौकिक माना जाता है।
क्या है जगन्नाथ रथ यात्रा?
जगन्नाथ रथ यात्रा मुख्य रूप से ओडिशा के पुरी में आयोजित की जाती है. इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं. इस यात्रा को भगवान के अपनी मौसी के घर जाने का प्रतीक भी माना जाता है. गुंडिचा मंदिर में कुछ दिनों तक विराजमान रहने के बाद भगवान की वापसी यात्रा होती है, जिसे बहुदा यात्रा कहा जाता है।
स्कंद पुराण में क्या कहा गया है?
स्कंद पुराण में जगन्नाथ धाम और रथ यात्रा के महत्व का विशेष उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति भगवान जगन्नाथ के रथ के दर्शन करता है या श्रद्धा से रथ यात्रा में शामिल होता है, उसे अनेक यज्ञों और तीर्थ यात्राओं के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह भी माना गया है कि भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आने के लिए मंदिर से बाहर निकलते हैं, ताकि हर व्यक्ति उनके दर्शन कर सके।
ब्रह्म पुराण में रथ यात्रा का महत्व
ब्रह्म पुराण में भगवान जगन्नाथ की यात्रा को मोक्ष प्रदान करने वाली यात्रा बताया गया है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान के दर्शन करने और उनके नाम का स्मरण करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और उसे आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है। यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु इस यात्रा का हिस्सा बनने के लिए पुरी पहुंचते हैं।
नारद पुराण और बाकी ग्रंथों में भी मिलता है उल्लेख
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान जगन्नाथ केवल एक मंदिर के देवता नहीं हैं, बल्कि वे समस्त सृष्टि के पालनहार माने जाते हैं। नारद पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी भगवान के दर्शन, भक्ति और रथ यात्रा के महत्व के बारे में बताया गया है। इन ग्रंथों में कहा गया है कि भगवान जब रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करते हैं, तब वे सभी भक्तों पर समान रूप से अपनी कृपा बरसाते हैं।
रथ खींचने का क्या है धार्मिक महत्व?
जगन्नाथ रथ यात्रा में सबसे विशेष परंपरा भगवान के रथ को श्रद्धालुओं द्वारा रस्सी से खींचने की है। धार्मिक मान्यता है कि रथ की रस्सी को श्रद्धा और भक्ति के साथ खींचने से व्यक्ति को विशेष पुण्य मिलता है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान के प्रति समर्पण और सेवा का प्रतीक भी माना जाता है।

