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Pakistan Water Crisis: भारत के फैसले से पाकिस्तान में गहराया जल संकट, 3 जलाशय, 6 बैराज और 12 नहरों पर बढ़ा दबाव

Pakistan Water Crisis: भारत के फैसले से पाकिस्तान में गहराया जल संकट, 3 जलाशय, 6 बैराज और 12 नहरों पर बढ़ा दबाव

ई 2025 में भारत ने एकतरफा तौर पर इस संधि को स्थगित करने की घोषणा की थीPakistan Water Crisis, (आज समाज), नई दिल्ली: भारत द्वारा सिंधु जल संधि स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान की सिंधु बेसिन सिंचाई प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है।

तीन जलाशय, छह बैराज और 12 लिंक नहरों में पानी की कमी से खेती, खाद्य सुरक्षा और जल प्रबंधन प्रभावित होने की आशंका है आने वाले दिनों में पाक में महंगाई और बढ़ सकती है।

तीन प्रमुख जलाशय, छह बैराज और बारह अंतर-नदी लिंक नहरों वाला यह विशाल नेटवर्क करीब साढ़े तीन करोड़ एकड़ भूमि की सिंचाई करता है और देश के 90 प्रतिशत से ज्यादा खाद्य उत्पादन का आधार है। इन पर पानी का संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

मराला में औसतन 25 मिलियन एकड़-फीट का वार्षिक प्रवाह वहन करते हुए, यह मराला, खानकी, कादिराबाद, ट्रिम्मू और पुंजनाद बैराजों के माध्यम से लगभग 10 मिलियन एकड़ भूमि की सिंचाई करता है। ये कमांड क्षेत्र पाकिस्तान के सबसे उत्पादक कृषि क्षेत्रों में से एक हैं, जो गेहूं, चावल, गन्ना और अन्य रणनीतिक फसलों के राष्ट्रीय उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और लाखों ग्रामीण आजीविका का समर्थन करते हैं। मगर पानी की कमी का असर आने वाले दिनों में इस पर साफ दिखाई दे सकता है। चावल, गेहूं की फसलें अगर प्रभावित होंगी तो देश में महंगाई और बढ़ सकती है।

लगातार घट रहा है पानी का स्तर

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईबीआईएस का प्रमुख मराला बैराज, जहां चिनाब नदी का औसत वार्षिक प्रवाह 25 मिलियन एकड़-फीट रहता है, वहां इस साल पानी का बहाव घटकर महज 1500 क्यूसेक रह गया है, जबकि सामान्य दिनों में यह करीब 34 हजार क्यूसेक होना चाहिए था। हालांकि, क्यूसेक का फिक्स अनुमान नहीं होता यह समय के साथ बदलता है।

महर इसके हिसाब से देखों तो प्रवाह में लगभग 95 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसका सीधा असर गेहूं, चावल और गन्ने जैसी फसलों पर पड़ रहा है, जिन पर पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा और लाखों किसानों की आजीविका टिकी है। साठ साल से ज्यादा पुरानी यह संधि अब तक जल-बंटवारे की सबसे स्थिर व्यवस्थाओं में गिनी जाती रही, लेकिन भारत के इस कदम ने पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता पैदा कर दी है।

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