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Security Cluster: आतंकी हमले के बाद हरकत में आया जम्मू-कश्मीर प्रशासन, प्रवासी मजदूरों के लिए क्लस्टर बनेंगे

Security Cluster: आतंकी हमले के बाद हरकत में आया जम्मू-कश्मीर प्रशासन, प्रवासी मजदूरों के लिए क्लस्टर बनेंगे

जदूरों को पुलिस स्टेशन में देनी होगी जानकारी, सिक्योरिटी वैरिफिकेशन के बाद मिलेंगी रहने की अनुमतिSecurity Cluster, (आज समाज), श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन गंभीर हो गया है।

मजदूरों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे है। घाटी में जहां प्रवासी मजदूर बिखरे हैं, असुरक्षित जगहों पर रह रहे हैं, उन्हें एक ही जगह ठहराने के लिए क्लस्टर बनाए जाएं। बाहरी मजदूरों को अलग-अलग नहीं रहने दिया जाएगा। घाटी आने वाले हर नए मजदूर को पास के पुलिस स्टेशन में​ जानकारी देनी होगी।

जहां नया मजदूर रहेगा, पुलिस उस इलाके का सिक्योरिटी वैरिफिकेशन करेगी। उसके बाद मजदूर को वहां रुकने दिया जाएगा। गौरतलब है कि कश्मीर के कुलगाम में 4 दिन पहले दो बाहरी मजदूरों की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। इस हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आ गया। एलजी मनोज सिन्हा भी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर अहम बैठक कर चुके है। बैठक में कुछ निर्देश तय हुए थे।

प्रशासन ने मजदूरों को सुरक्षित क्लस्टरों में भेजना शुरू किया

घाटी में 199 रजिस्टर्ड भट्ठे। ज्यादातर मध्य कश्मीर के बडगाम और दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम और पुलवामा में हैं। पुलिस के अनुसार प्रवासियों को व्यक्तिगत सुरक्षा देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

इसलिए र्इंट-भट्टों और बागानों में काम करने वाले यूपी, बिहार और छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को बिखरी हुई झोपड़ियों के बजाय नामित सुरक्षित क्लस्टरों में भेजना शुरू कर दिया है।

अब तक 23 प्रवासियों को निशाना बना चुके आतंकी

2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से घाटी में गैर स्थानीय प्रवासियों पर हमले बढ़े हैं। संसदीय आंकड़ों और गृह मंत्रालय के आधिकारिक बयानों के अनुसार इन सात साल में आतंकवादी अब तक करीब 23 प्रवासियों की टारगे​ट किलिंग कर चुके हैं।

कश्मीर घाटी में तनाव को कम करने में मिलेगी मदद

इस क्लस्टर सिस्टम के जरिए प्रशासन आशा कर रहा है कि हर प्रवासी मजदूर की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे न केवल मजदूरों को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उनके परिवारों को भी मानसिक संतोष मिलेगा। प्रशासन की कोशिश है कि इस तरह के उपायों से कश्मीर घाटी में तनाव को कम किया जा सके।

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