प्रथम पूज्य भगवान गणेष की पूजा और व्रत को समर्पित है संकष्टी चतुर्थीVikat Sankashti Chaturthi, (आज समाज), नई दिल्ली: सनातन धर्म में हर माह की चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व है, क्योंकि ये तिथि विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य भगवान गणेष की पूजा और व्रत को समर्पित की गई है।
हर माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर विघ्नहर्ता गणेश को समर्पित संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है।
वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। साथ ही भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है। इस साल 05 अप्रैल को विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन व्रत और भगवान गणेश का पूजन करने से जीवन के बड़े से बड़े विघ्न दूर होते हैं।
जीवन में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। इस दिन कुछ विशेष उपाय भी किए जाते हैं। मान्यता है कि इन उपायों को करने से नौकरी और काम में बार-बार आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, तो आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में।
विकट संकष्टी चतुर्थी पर करें ये उपाय
- विकट संकष्टी चतुर्थी का रखें व्रत: कई बार कुंडली में बने दोष या बाधक योगों से नौकरी और काम में बाधाएं और रुकावट पैदा होती है। मान्यता है कि विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत और पूजा इन नकारात्मक प्रभावों को कम करता है। इससे नौकरी और काम में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
- चंद्रमा को दें अर्घ्य: चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व धर्म शास्त्रों में बताया गया है। इससे मन स्थिर होता है और जब मन में शांति होती है, तो व्यक्ति के फैसलों में स्पष्टता होती है। इससे करियर और जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।
- गणेश जी की पूजा करें: कुंडली में बुध के कमजोर होने पर नौकरी और व्यापार में बाधाएं आती हैं। इस दिन गणेश पूजा करने से बुध मजबूत होता है। सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है, जिससे नौकरी और व्यापार की बाधाएं खत्म होती हैं।
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