West Bengal, (आज समाज), नई दिल्ली: भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल मतदाता सूची गहन निरीक्षण (एसआईआर) में विचाराधीन 60 लाख से ज्यादा केसेज का विस्तृत डेटा रिलीज कर दिया है।
इसके बाद इस प्रक्रिया के तहत अब तक प्रदेश में कुल 90 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम हटाए जा चुके हैं। बंगाल एसआईआर को लेकर जिलावार तरीके से नाम जोड़ने व नाम हटाने का डेटा भी सार्वजनिक किया गया है, जो चुनाव अयोग के इतिहास में पहली बार है। अधिकारियों का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
विपक्ष बता रहा मतदाताओं को बाहर करने की साजिश
विपक्ष मतदाताओं को बाहर करने की साजिश बता रहा है। बता दें कि पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण की प्रक्रिया 3 बड़े चरणों में कंपलीट हुई है। पिछले वर्ष दिसंबर जब शुरुआती ड्राफ्ट बनाया जा रहा था, उस समय 58.2 लाख नाम सूची से हटाए गए थे। इसके बाद इस वर्ष फरवरी में अंतिम सूची के प्रकाशन तक 5.46 लाख और नाम लिस्ट से हटाए गए। एसआईआर प्रक्रिया व नाम हटाने के आंकड़ों पर एक बार फिर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है।
वर्तमान में 27 लाख से ज्यादा नाम हटाने का निर्णय
न्यायिक अधिकारियों के दखल व विस्तृत जांच किए जाने के बाद राज्य में मतदाता सूची से वर्तमान में 27 लाख से ज्यादा नाम हटाने का निर्णय लिया गया है। इससे अब तक सूची से हटाए गए वोटरों के नामों की कुल संख्या 90 लाख से अधिक हो गई है। ईसी के अनुसार आयोग ने ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ यानी डेटा में तकनीकी दिक्कतों के बेस पर 60 लाख से अधिक वोटरों को जांच के दायरे में रखा था। इन केसेज को ‘अंडर एडजुडिकेशन श्रेणी में रखा गया था, ताकि न्यायिक अधिकारी इनकी जांच कर सकें।
59.84 लाख केसेज का निपटारा कंपलीट
आयोग के सूत्रों के मुताबिक अब तक तकरीबन 59.84 लाख केसेज का निपटारा पूरा हो चुका है और ताजा जांच के बाद लगभग 32.68 लाख पात्र लोगों के नाम सूची में फिर से जोड़े गए हैं। वहीं अपात्र पाए गए 27.16 लाख वोटरों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं और अन्य केसेज की समीक्षा अभी जारी है। बता दें कि बंगाल में इसी महीने के अंत में दो चरणों विधानसभा चुनाव होने हैं। पहले चरण के तहत 23 अप्रैल को वोटिंग होगी और दूसरे चरण के तहत राज्य में 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे।

