तमिलनाडु सरकार के नगर प्रशासन विभाग की संयुक्त आयुक्त सुश्री अनामिका रमेश (IAS) के नेतृत्व में आए इस दल का मुख्य लक्ष्य लखनऊ की एकीकृत सीवरेज प्रबंधन प्रणाली को समझना था। यह 'एक्सपोज़र विजिट' अन्य राज्यों के लिए एक बेंचमार्क के रूप में कार्य करती है।
इस मॉडल के तहत, पूरे शहर के सीवरेज नेटवर्क और शोधन का जिम्मा एक ही पेशेवर एजेंसी (इस मामले में सुएज) को दिया गया है। इसके लाभ जो प्रतिनिधिमंडल ने देखे:
तकनीकी दक्षता: आधुनिक उपकरणों जैसे 'सुपर सकर' मशीनों का उपयोग।
सुरक्षा मानक: सीवर सफाई में मानवीय हस्तक्षेप को कम कर यंत्रीकृत सफाई (Mechanized Cleaning) पर जोर।
एकीकृत प्रबंधन: ग्वारी सीवेज पम्पिंग स्टेशन जैसे केंद्रों के माध्यम से नेटवर्क का सुव्यवस्थित संचालन।
तकनीकी प्रस्तुति: परियोजना निदेशक राजेश मठपाल ने डेटा और सुधार के आँकड़ों के माध्यम से यह बताया कि कैसे निजी भागीदारी से सेवाओं में गुणवत्ता आई है।
यंत्रीकृत सफाई: प्रतिनिधिमंडल ने प्रत्यक्ष रूप से देखा कि कैसे भारी मशीनों के उपयोग से शहर के सीवर नेटवर्क को बिना किसी जोखिम के साफ रखा जा रहा है।
इस प्रकार के दौरों से यह सिद्ध होता है कि लखनऊ का OCOP मॉडल भारत के अन्य बड़े शहरों के लिए 'रोल मॉडल' बन सकता है। यह दर्शाता है कि सरकारी निगरानी और निजी परिचालन दक्षता का सही तालमेल नागरिक सेवाओं को बेहतर बना सकता है।

