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बढ़ता तापमान पश्चिमी यूरोप के लिए बना खतरा, भूमध्यसागरीय देश सबसे ज्यादा संवेदनशील: जलवायु विशेषज्ञ

बढ़ता तापमान पश्चिमी यूरोप के लिए बना खतरा, भूमध्यसागरीय देश सबसे ज्यादा संवेदनशील: जलवायु विशेषज्ञ

बार्सिलोना, 1 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिमी यूरोप दुनिया के कई अन्य क्षेत्रों की तुलना में तेजी से गर्म हो रहा है, जिससे हीटवेव की घटनाएं अधिक बार और अधिक तीव्र रूप में सामने आ रही हैं।

इसके साथ ही जंगलों में भीषण आग लगने की स्थितियां भी लगातार बढ़ रही हैं। स्पेन के सरकारी मौसम विज्ञान विभाग के प्रवक्ता और जलवायु विशेषज्ञ रूबेन डेल कैंपो ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि जुलाई के अंत में स्पेन इस वर्ष की चौथी हीटवेव का सामना कर रहा था। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, देश के कई हिस्सों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। डेल कैंपो के अनुसार, जून और जुलाई 2026 दोनों ही स्पेन के लिए असाधारण रूप से गर्म महीने रहे हैं।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 स्पेन के इतिहास का दूसरा सबसे गर्म और तीसरा सबसे शुष्क जून महीना रहा। देश में 1961 से मौसम संबंधी रिकॉर्ड रखे जा रहे हैं।

अत्यधिक गर्मी के साथ जंगलों में आग लगने की घटनाओं में भी तेजी आई है। इस गर्मी में स्पेन और दक्षिणी फ्रांस में लगातार फैल रही वनाग्नि के कारण अब तक लगभग दो लाख लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है।

स्पेन की सरकारी मौसम एजेंसी एईएमईटी के प्रवक्ता रूबेन डेल कैंपो ने शुक्रवार को कहा, "कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, इटली, स्पेन और पुर्तगाल सहित पश्चिमी यूरोप दुनिया के कई अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक तेजी से गर्म हो रहा है। साथ ही, यह क्षेत्र हीटवेव की घटनाओं के प्रति भी अधिक संवेदनशील होता जा रहा है।"

प्रवक्ता के अनुसार, भूमध्य सागर के आसपास स्थित देश नई जलवायु परिस्थितियों में हीटवेव के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील देशों में शामिल हैं। स्पेन के कुछ हिस्सों में मई के अंत तक ही तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने जुलाई में कहा था कि 1976 की ऐतिहासिक हीटवेव के बाद से पूरे यूरोप का औसत तापमान लगभग 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। संगठन का मानना है कि गर्मियों के तापमान में लगातार हो रही यह वृद्धि मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन का परिणाम है। डेल कैंपो भी इस निष्कर्ष से सहमत हैं।

उन्होंने कहा, "जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी के बीच स्पष्ट संबंध है। औसत तापमान में वृद्धि हमेशा अत्यधिक गर्मी के दौरों में बढ़ोतरी लाती है और वर्तमान में हम ठीक यही स्थिति देख रहे हैं।"

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मैड्रिड के पास के इलाकों और दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस, खासकर बोर्डो के आसपास, सेंट्रल स्पेन के कुछ हिस्सों में बड़ी आग लगी है। डेल कैंपो ने कहा, "गर्मी जल्दी शुरू होती है, और बारिश की कमी का मतलब है कि गर्मियों में सूखा भी जल्दी शुरू हो जाता है। इसका मतलब है कि जंगल के पेड़-पौधे, खासकर बारीक घास और झाड़ियां, ज्यादा तेजी से और तेजी से सूख जाती हैं। जब आग लगती है, तो यह सूखा ऑर्गेनिक मैटर और तेजी से जलता है, जिससे आग को शुरू से ही नियंत्रण करना मुश्किल हो जाता है।"

तापमान ज्यादा रहने की वजह से जंगल में आग लगने का खतरा पूरे अगस्त बना रह सकता है। उन्होंने कहा, "सिर्फ मौसम संबंधी कारणों से, आग मैनेजमेंट को इन लंबी और गर्मियों के हिसाब से खुद को ढालना होगा।"

स्पेन के इकोलॉजिकल ट्रांजिशन और डेमोग्राफिक चैलेंज मंत्रालय के अनुसार, जुलाई के आखिर तक, स्पेन में जंगल की आग ने लगभग 1 लाख, 80 हजार हेक्टेयर जमीन आग की चपेट में थी, जो 2025 में इसी समय के दौरान दर्ज 29,817 हेक्टेयर से लगभग छह गुना ज्यादा है।

--आईएएनएस

एसडी/वीसी

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