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जयंत चौधरी का अखिलेश पर हमला, बोले- आजकल 'ट्विटर-ट्विटर' खेलने वाले नेता हर मामले में जाति तलाश रहे हैं

जयंत चौधरी का अखिलेश पर हमला, बोले- आजकल 'ट्विटर-ट्विटर' खेलने वाले नेता हर मामले में जाति तलाश रहे हैं

खनऊ, 30 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने रविवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अखिलेश की जाति आधारित राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ लोग हर मुद्दे में जाति तलाश रहे हैं और सोशल मीडिया पर 'ट्विटर-ट्विटर' का खेल-खेल रहे हैं।

उन्होंने दो टूक कहा कि रालोद उत्तर प्रदेश को जाति का अखाड़ा नहीं बनने देगा। यह पीडीए नहीं पीड़ा और बौखलाहट है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित सम्मान समारोह में जयंत चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव द्वारा पीडीए को लेकर की जा रही राजनीति दरअसल 'पीड़ा और बौखलाहट' है। उन्होंने कहा कि राजनीति को जातीय संघर्ष का मंच बनाने के बजाय समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है।

जयंत चौधरी ने कहा, ''कुछ लोग झगड़ों को भी राजनीतिक चश्मे से देखते हैं और राजनीतिक रोटियां सेंकने की बात करते हैं। चौधरी चरण सिंह ने हमें सभी का आदर करना सिखाया है। वह जातिवाद की राजनीति नहीं करते थे। वह समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि राजनीति में मुद्दा अहंकार, भ्रष्टाचार, चोरी और धोखाधड़ी का होना चाहिए। उन्होंने इसे 'एबीसीडी' बताते हुए कहा कि समाज के लोगों ने सभी का सम्मान करना सीखा है।

रालोद अध्यक्ष ने कहा कि अब शांत रहने का वक्त नहीं है। उन्होंने अखिलेश यादव का बिना नाम लिए कहा कि लखनऊ में बैठे बड़े राजनीतिक अध्यक्ष आजकल 'ट्विटर-ट्विटर' का खेल-खेल रहे हैं और हर मामले में जाति तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा, '' जिस समाज को कहा गया कि हमने सिखाया, वह चौधरी चरण सिंह का समाज है। आपसे समाज नहीं, आप समाज हैं। इस चुनाव में आपको पटखनी देकर चौधरी चरण सिंह का समाज आपको जवाब देगा। अकेले जयंत को जवाब देने की आवश्यकता नहीं है।''

जयंत चौधरी ने कहा कि सामने वाला पक्ष हर हथकंडा अपना रहा है। पहले उत्तर प्रदेश को 'उल्टा-पुल्टा प्रदेश' कहा जाता था और अब दोबारा प्रदेश को उसी दिशा में ले जाने की कोशिश की जा रही है। रालोद अध्यक्ष ने चौधरी चरण सिंह की विरासत को लेकर भी राजनीतिक दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चौधरी साहब के नाम पर सभी ने दल बनाए और चुनावों में उनका नाम भुनाया। उन्होंने कहा कि वह इसे गलत नहीं मानते, लेकिन उनकी तस्वीर लगाना आसान है, जबकि उनके बताए रास्ते पर चलना बेहद कठिन है।

उन्होंने कहा कि कोई भी संगठन 'वैक्यूम' में काम नहीं करता। कार्यकर्ताओं की भावनाओं की कद्र होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ठहरा हुआ पानी खराब हो जाता है, इसलिए नए विचारों वाले युवाओं को पुराने कार्यकर्ताओं का सहयोग और जगह मिलनी चाहिए। जयंत चौधरी ने कहा कि चुनाव में केवल जाति की चर्चा नहीं होनी चाहिए, बल्कि युवा, किसान, व्यापारी, उद्यमी, कुटीर उद्योग और शिक्षक जैसे मुद्दों पर भी बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की परिभाषा भी बदल रही है और आज जेन जी तथा जेन अल्फा की पीढ़ी सामने है, जबकि वह खुद जेन एक्स से हैं।

कार्यक्रम में रालोद के कार्यकारी अध्यक्ष अनुपम मिश्र ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में कोई भी सरकार रालोद की मदद के बिना नहीं बन पाएगी। उन्होंने कहा कि रालोद का प्रभाव केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पार्टी पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में भी अपनी पकड़ मजबूत करेगी।

वहीं, बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ कार्यक्रम में पहुंचे रालोद के स्नातक राजनीति से जुड़े नेता बीके शुक्ला ने कहा कि रालोद पर टिप्पणी करने वालों को समझ लेना चाहिए कि प्रदेश में 'असली चौधरी' आ गया है। बीके शुक्ला ने जयंत चौधरी के सामने वित्तविहीन निजी कॉलेजों की समस्याएं भी रखीं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 50 से 55 प्रतिशत निजी कॉलेज हैं और उच्च शिक्षा का बड़ा बोझ इन्हीं संस्थानों पर है। उन्होंने कहा कि वित्तविहीन कॉलेजों को सरकार की ओर से कोई सहायता नहीं मिलती। उन्होंने जयंत चौधरी से इस दिशा में सरकार स्तर पर विचार करने का आग्रह किया।

--आईएएनएस

विकेटी/एसके

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