जयपुर में सुरक्षा एजेंसियों के लिए चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा आतंकी उमर हारिस उर्फ 'खरगोश' करीब एक साल तक शहर में रहकर न सिर्फ पहचान छिपाए रहा, बल्कि उसने स्थानीय दस्तावेज भी बनवा लिए।

जयपुर में सुरक्षा एजेंसियों के लिए चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा आतंकी उमर हारिस उर्फ 'खरगोश' करीब एक साल तक शहर में रहकर न सिर्फ पहचान छिपाए रहा, बल्कि उसने स्थानीय दस्तावेज भी बनवा लिए।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने जयपुर में एसी मैकेनिक के रूप में काम किया और इस दौरान उसने शहर के कई संवेदनशील स्थानों जैसे मॉल और मंदिरों की रेकी भी की। जांच एजेंसियों का मानना है कि उसकी गतिविधियां किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती थीं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया के दौरान दो राज्यों की पुलिस वेरिफिकेशन में भी यह मामला पकड़ में नहीं आया। इससे सुरक्षा और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि आरोपी बाद में देश छोड़कर विदेश फरार हो गया। अब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां उसके नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।
जांच के तहत पुलिस उसके चार संदिग्ध साथियों के मोबाइल फोन का डिलीट डेटा रिकवर कर रही है, ताकि उसके संपर्कों और गतिविधियों की पूरी कड़ी जोड़ी जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इस डेटा से कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
फिलहाल, एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उमर हारिस को स्थानीय स्तर पर किसने मदद पहुंचाई और उसकी गतिविधियों का असली उद्देश्य क्या था। यह मामला सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।