कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह व्यवहार केवल निजी पसंद का मामला नहीं है, बल्कि यह वैवाहिक कर्तव्यों और विश्वास के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। फैसले में कहा गया कि चाहे संबंधित पुरुष रिश्तेदार हो या दोस्त, इस प्रकार के रोमांटिक इशारे और सार्वजनिक पोस्ट वैवाहिक रिश्तों को कमजोर करते हैं और उन्हें "वैवाहिक दुर्व्यवहार" और "क्रूरता" माना जा सकता है।मामले में सामने आया कि महिला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खुद को अविवाहित बताया था और अन्य पुरुष के साथ रोमांटिक तस्वीरें साझा की थीं। इन पोस्ट्स पर "आई लव यू जान" जैसे कमेंट्स भी पाए गए, जिन्हें अदालत ने रिश्ते में विश्वास टूटने का प्रमाण माना।