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सैनिकों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च होगा कम, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस से किया करार

सैनिकों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च होगा कम, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस से किया करार

ई दिल्ली, 02 सितंबर (आईएएनएस) देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों के बच्चों की पढ़ाई को लेकर भारतीय सेना ने एक अहम कदम उठाया है। सेना ने देहरादून के कंबाइंड (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैन्यकर्मियों के बच्चों को यहां पढ़ाई के दौरान अधिक सहायता दी जाएगी।

सेना के जिन जवानों ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए हैं, उनके परिवारजनों और बच्चों की शिक्षा को लेकर अतिरिक्त सहयोग देने का प्रावधान किया गया है। इस समझौते से सेना में कार्यरत जवानों के बच्चों के लिए भी उच्च शिक्षा हासिल करने के रास्ते और आसान होंगे। समझौते के तहत संस्थान भारतीय सेना के सेवारत और सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों के पात्र बच्चों को ट्यूशन फीस में विशेष छूट देगा। यानी सेना के जवान अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर मिलने वाली इस आर्थिक राहत का लाभ उठा सकेंगे।

शहीद हुए जवानों के परिवारों के लिए यहां विशेष सहायता का प्रावधान किया गया है। दरअसल सैनिक जब सीमा पर देश की सुरक्षा में तैनात होता है, तो उसके परिवार की जिम्मेदारी भी एक महत्वपूर्ण चिंता होती है। बच्चों की बेहतर शिक्षा इसी जिम्मेदारी का एक बड़ा हिस्सा है। ऐसे में फीस में विशेष छूट परिवारों के लिए आर्थिक राहत के साथ-साथ बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने में मदद करेगी।

भारतीय सेना ने कहा है कि यह पहल अपने सैन्यकर्मियों और उनके निकटतम परिजनों के कल्याण के प्रति सेना की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस समझौते का संदेश साफ है कि देश की रक्षा में सैनिक अपना कर्तव्य निभाते हैं, तो उनके बच्चों की शिक्षा और भविष्य को मजबूत बनाने में संस्थान और सेना भी उनके साथ खड़े हैं।

गौरतलब है कि भारतीय सेना जवानों के परिवारों के लिए अच्छे रोजगार व प्रशिक्षण पर भी काम कर रही है। हाल ही में एयर इंडिया व सेना के बीच हुए समझौते के तहत रोजगार के ठोस अवसरों का का सृजन हुआ था। इस पहल के तहत देशभर से 58 उम्मीदवारों का चयन रोजगार के लिए किया गया। इनमें भारतीय सेना से जुड़ी वीर नारियों और उनके आश्रितों को अवसर प्रदान किए गए। इनमें से दो महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय जॉब हासिल हुई थी।

इस पहल के तहत चयनित उम्मीदवारों को विमानन और हवाई अड्डा सेवाओं से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। पहले चरण में 16 उम्मीदवारों ने प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और उन्हें रोजगार के लिए शामिल किया जा चुका है। इनमें वीर नारियां और उनके बच्चे शामिल हैं।

--आईएएनएस

जीसीबी/पीएम

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