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सुप्रीम कोर्ट ने पीएमके के संस्थापक एस. रामदास से कहा , 'आम' चुनाव चिह्न विवाद के लिए सिविल कोर्ट जाएं

सुप्रीम कोर्ट ने पीएमके के संस्थापक एस. रामदास से कहा , 'आम' चुनाव चिह्न विवाद के लिए सिविल कोर्ट जाएं

ई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के संस्थापक डॉ एस. रामदास की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि पार्टी के 'आम' (मैंगो) चुनाव चिह्न को लेकर विवाद सुलझाने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है।

कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया है, जिसमें रामदास द्वारा दायर रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि पीएमके जैसी गैर-पंजीकृत राजनीतिक पार्टियों के अंदरूनी विवादों, खासकर चुनाव चिह्न के आवंटन से जुड़े मामलों में चुनाव आयोग हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

यह विवाद मुख्य रूप से रामदास के गुट और उनके बेटे डॉ. अंबुमणि रामदास के नेतृत्व वाले गुट के बीच पार्टी की कमान और 'आम' चिह्न के इस्तेमाल को लेकर है। रामदास ने चिह्न अपने गुट को आवंटित करने या इसे फ्रीज करने की मांग की थी, ताकि अंबुमणि का गुट इसका उपयोग न कर सके।

सुप्रीम कोर्ट ने रामदास से कहा कि वे इस मामले में सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर करें। कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि वह इस विवाद की सुनवाई तेजी से करे और जल्द फैसला सुनाए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि रामदास के पास कानूनी रास्ता पूरी तरह खुला है और वे सिविल कोर्ट जाकर पार्टी के नाम, झंडे और चिह्न पर अपने दावे को मजबूत कर सकते हैं।

यह पूरा मामला पीएमके के भीतर लंबे समय से चल रहे पारिवारिक और नेतृत्व विवाद से जुड़ा है। रामदास ने पार्टी की स्थापना की थी, लेकिन हाल के वर्षों में उनके बेटे अंबुमणि को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद गुटबाजी बढ़ गई। मद्रास हाई कोर्ट ने पहले ही कहा था कि ऐसे विवादों का निपटारा सिविल कोर्ट में होना चाहिए, न कि चुनाव आयोग या रिट याचिका के जरिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी राय से सहमति जताई है।

कोर्ट के इस फैसले से तमिलनाडु चुनाव में पीएमके की स्थिति पर असर पड़ सकता है, क्योंकि 'आम' चिह्न पार्टी की पहचान है। फिलहाल, विवाद सिविल कोर्ट में जाएगा, जहां दोनों पक्षों को अपने दावों के सबूत पेश करने होंगे।

--आईएएनएस

डीकेपी/

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