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राम मंदिर ट्रस्ट में बदलाव की अटकलें! चंपत राय के उत्तराधिकारी के रूप में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती का नाम सबसे आगे

राम मंदिर ट्रस्ट में बदलाव की अटकलें! चंपत राय के उत्तराधिकारी के रूप में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती का नाम सबसे आगे

- चंपत राय के इस्तीफे पर आज हो सकती है चर्चा- नए महासचिव को लेकर मंथन
Image Source:(Internet)
एबी न्यूज़ नेटवर्क। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के विवाद के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के संभावित इस्तीफे पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। इसी बीच, उनके उत्तराधिकारी के रूप में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती का नाम सबसे प्रमुख दावेदार के तौर पर सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और अयोध्या के कई प्रमुख संत स्वामी वासुदेवानंद को महासचिव बनाए जाने के पक्ष में हैं। ट्रस्ट के अधिकांश सदस्यों के बीच भी उनके नाम पर व्यापक सहमति बनने की बात कही जा रही है। हालांकि, यह भी बताया जा रहा है कि स्वामी वासुदेवानंद स्वयं इस जिम्मेदारी को स्वीकार करने के इच्छुक नहीं हैं और उन्होंने अपनी अनिच्छा स्पष्ट रूप से व्यक्त कर दी है। उनके करीबी लोगों का कहना है कि मौजूदा विवाद के कारण ट्रस्ट की छवि प्रभावित हुई है और वे इस विवाद का दायित्व अपने ऊपर नहीं लेना चाहते।

कौन हैं स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती?
स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती लंबे समय से विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहे हैं और राम मंदिर आंदोलन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्तमान महासचिव चंपत राय जहां विहिप के उपाध्यक्ष हैं, वहीं स्वामी वासुदेवानंद संगठन की कई प्रमुख गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने लंबे समय तक ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य होने का दावा भी किया, लेकिन इलाहाबाद जिला अदालत और इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उनके दावे को मान्यता नहीं दी। यह मामला फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद संत समाज, विहिप और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बीच उनका विशेष सम्मान और प्रभाव माना जाता है। यही वजह है कि उन्हें ट्रस्ट के महासचिव पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है।

महासचिव पद स्वीकार करने के इच्छुक नहीं
सूत्रों के मुताबिक, स्वामी वासुदेवानंद चढ़ावे की कथित चोरी के विवाद से काफी व्यथित हैं और उन्होंने ट्रस्ट में अपनी मौजूदा भूमिका से भी अलग होने की इच्छा जताई है। उनका मानना है कि वे केवल राम मंदिर निर्माण के उद्देश्य से ट्रस्ट से जुड़े थे और अब मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद वे सक्रिय भूमिका में बने रहने के इच्छुक नहीं हैं। ऐसे में यदि वे महासचिव पद स्वीकार करने से इनकार करते हैं तो सोमवार की बैठक में नए महासचिव की नियुक्ति होना मुश्किल माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य फिलहाल इस फैसले को टालने के पक्ष में हैं और या तो स्वामी वासुदेवानंद की सहमति मिलने का इंतजार करेंगे या फिर भविष्य में किसी अन्य नाम पर विचार करेंगे। ऐसे में आज की बैठक में ट्रस्ट के भविष्य की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण निर्णयों पर सभी की नजर बनी हुई है।

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