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टॉडलर्स में बढ़ता निकोटीन का खतरा: वेपिंग बनी नई चिंता

टॉडलर्स में बढ़ता निकोटीन का खतरा: वेपिंग बनी नई चिंता

- निकोटीन एक्सपोजर में बड़ा बदलाव

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बी न्यूज़ नेटवर्क। छोटे बच्चों में निकोटीन के संपर्क को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गंभीर चेतावनी जारी की है। हालिया अध्ययन में पाया गया कि अब पारंपरिक सिगरेट की जगह वेपिंग डिवाइस बच्चों के लिए निकोटीन एक्सपोज़र का सबसे बड़ा कारण बनते जा रहे हैं।

2016 से 2023 के बीच पांच साल से कम उम्र के बच्चों में निकोटीन एक्सपोजर के 92,000 से अधिक मामलों का विश्लेषण किया गया। इसमें सामने आया कि जहां सिगरेट से जुड़े मामलों में लगभग 43% की कमी आई, वहीं वेप्स और इसी तरह के डिवाइस से जुड़े मामलों में 243% की चौंकाने वाली बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि निकोटीन के खतरे का स्वरूप अब पहले से काफी अलग हो चुका है।

बच्चों में वेपिंग का नया जोखिम

विशेषज्ञों के अनुसार, अब खतरा केवल गलती से निकोटीन निगलने तक सीमित नहीं है, बल्कि कई मामलों में छोटे बच्चे सीधे वेपिंग डिवाइस का उपयोग कर रहे हैं। शोध के प्रमुख लेखक पेरी रोसेन ने कहा कि बच्चों द्वारा इन उपकरणों से निकलने वाले धुएं को सांस के जरिए अंदर लेना चिंता का बड़ा कारण है। यह स्थिति पहले कम देखने को मिलती थी, लेकिन अब बढ़ती जा रही है। यानी बच्चे केवल संपर्क में ही नहीं आ रहे, बल्कि सक्रिय रूप से वेपिंग की नकल कर रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।

वेप्स क्यों हैं ज्यादा खतरनाक

विशेषज्ञ बताते हैं कि वेपिंग डिवाइस बच्चों के लिए ज्यादा आकर्षक होते हैं। ये रंग-बिरंगे, हल्के और इस्तेमाल में आसान होते हैं, जिससे वे खिलौनों जैसे लगते हैं। न्यू जर्सी पॉइजन कंट्रोल सेंटर की मेडिकल डायरेक्टर डायन कैलेलो के अनुसार, बच्चे अक्सर अपने माता-पिता या घर के अन्य सदस्यों को वेपिंग करते देख उनकी नकल करते हैं। वे बिना समझे इन डिवाइस को मुंह में लगाकर इनहेल करते हैं, जिससे निकोटीन उनके शरीर में प्रवेश कर जाता है। निकोटीन एक अत्यधिक लत लगाने वाला पदार्थ है, जो बच्चों के मस्तिष्क के विकास पर गंभीर असर डाल सकता है।

सुरक्षा उपायों की बढ़ती जरूरत

मौजूदा नियम मुख्य रूप से निकोटीन लिक्विड की पैकेजिंग को सुरक्षित बनाने पर केंद्रित हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह पर्याप्त नहीं है। पैकेजिंग भले ही बच्चों को लिक्विड निगलने से रोक सकती है, लेकिन यह उन्हें वेपिंग की नकल करने से नहीं रोकती। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि अब समय आ गया है कि डिवाइस में ही सुरक्षा फीचर्स जोड़े जाएं, जैसे फ्लो रेस्ट्रिक्टर्स, ताकि बच्चों के लिए इन्हें चालू करना मुश्किल हो सके। बढ़ती वेपिंग प्रवृत्ति इस बात का संकेत है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इसका दीर्घकालिक प्रभाव बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।


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