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आपका चेहरा ही आपकी चाबी है! Facial Recognition डेटा लीक हुआ तो बदल नहीं पाएंगे पहचान, जानिए क्या है खतरा

आपका चेहरा ही आपकी चाबी है! Facial Recognition डेटा लीक हुआ तो बदल नहीं पाएंगे पहचान, जानिए क्या है खतरा

Facial Recognition: सोचिए आप किसी दुकान में जाते हैं और कुछ खरीदने से पहले ही कैमरा आपका चेहरा स्कैन कर लेता है. आजकल यही हकीकत है. मॉल, बैंक, एयरपोर्ट और ऑफिस हर जगह चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक तेजी से इस्तेमाल हो रही है.

लेकिन सवाल यह है कि अगर आपका यह डेटा चोरी हो जाए तो क्या होगा?

पासवर्ड बदला जा सकता है, चेहरा नहीं

अगर किसी का पासवर्ड चोरी हो जाए तो वह उसे बदल सकता है. कार्ड डिटेल लीक हो जाए तो नया कार्ड बन सकता है. लेकिन चेहरे की पहचान (Facial Recognition) के साथ ऐसा संभव नहीं है. आप अपने चेहरे को रीसेट नहीं कर सकते. यही वजह है कि यह डेटा सबसे संवेदनशील माना जाता है.

कैसे काम करती है यह तकनीक?

फेशियल रिकग्निशन सिस्टम आपकी फोटो स्टोर नहीं करता बल्कि चेहरे को एक डिजिटल फॉर्म में बदल देता है. इसमें चेहरे के फीचर्स जैसे आंख, नाक और हड्डियों की बनावट को गणितीय डेटा में बदल दिया जाता है. जब भी कोई कैमरा आपको स्कैन करता है, वह इस डेटा से मिलान करता है और आपकी पहचान की पुष्टि करता है.

डेटा लीक हुआ तो खतरा जिंदगीभर

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह डिजिटल डेटा भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. अगर किसी सिस्टम से यह जानकारी चोरी हो जाए तो इसका दुरुपयोग लंबे समय तक हो सकता है. एक बार डेटा लीक हो गया तो कोई भी व्यक्ति आपकी पहचान का गलत इस्तेमाल कर सकता है और इसे रोकना आसान नहीं होगा.

हर जगह हो रही है ट्रैकिंग

फिंगरप्रिंट या आई स्कैन जैसी तकनीक आमतौर पर सीमित जगहों पर इस्तेमाल होती है लेकिन चेहरे की पहचान वाली तकनीक आपको बिना बताए भी ट्रैक कर सकती है. सड़क पर लगे कैमरे, मॉल के सिक्योरिटी सिस्टम या स्टेडियम ये सभी दूर से ही आपका चेहरा कैप्चर कर सकते हैं और आपके मूवमेंट्स रिकॉर्ड कर सकते हैं.

पहचान चोरी का नया खतरा

अगर किसी हैकर के पास आपका फेस डेटा आ जाए, तो वह इसे ऑनलाइन तस्वीरों या कैमरा फुटेज से जोड़ सकता है. इससे आपकी गतिविधियों को ट्रैक करना आसान हो जाता है. और अगर यह डेटा अन्य लीक जानकारी जैसे ईमेल, फोन नंबर या एड्रेस के साथ जुड़ जाए तो आपकी पूरी डिजिटल पहचान खतरे में पड़ सकती है.

AI और Deepfake से बढ़ा खतरा

आज के समय में AI और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल करके किसी का चेहरा नकली वीडियो या फोटो में लगाया जा सकता है. अगर फेस डेटा गलत हाथों में चला जाए, तो अपराधी आपकी पहचान बनाकर सिस्टम को धोखा दे सकते हैं जैसे बैंक वेरिफिकेशन या सिक्योरिटी चेक.

खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

इस खतरे को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है लेकिन कुछ सावधानियां मदद कर सकती हैं. कंपनियों को चाहिए कि वे सिर्फ जरूरी डेटा ही रखें, उसे एन्क्रिप्ट करें और समय-समय पर डिलीट करें. वहीं यूजर्स को भी जागरूक रहना चाहिए यह समझना जरूरी है कि आपका डेटा कहां और कैसे इस्तेमाल हो रहा है. जरूरत पड़ने पर कंपनियों से यह जानकारी मांगना भी आपका अधिकार है.

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Author : एबीपी टेक डेस्क

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