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बस्ती में एक सुर में 2500 महिलाओं के कंठों से गूंजा पारंपरिक 'सोहर' गायन, बना गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

बस्ती में एक सुर में 2500 महिलाओं के कंठों से गूंजा पारंपरिक 'सोहर' गायन, बना गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

त्तर प्रदेश के बस्ती में एक भव्य और ऐतिहासिक सांस्कृतिक महाकुंभ में 2500 महिलाओं ने एक साथ, एक सुर और एक ताल में पारंपरिक 'सोहर' का गायन कर 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज करा लिया.

गिनीज बुक के आधिकारिक प्रतिनिधियों ने जैसे ही इस रिकॉर्ड की पुष्टि की, पूरा जनपद भारत माता की जय' के नारों से सराबोर हो उठा. यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय ग्रामीण अस्मिता का वैश्विक शिलान्यास था.

यह ऐतिहासिक समागम केवल लोकगीतों के गायन और कीर्तिमान स्थापित करने तक सीमित नहीं रहा. इस मंच ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की एक ऐसी नई परिभाषा लिखी, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा. आयोजन में शामिल हजारों ग्रामीण और शहरी महिलाओं ने इस मंच के माध्यम से देश के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता ज्ञापित की.

25 महिलाओं ने बनाया गिनीज रिकॉर्ड

महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि जिस तरह देश को नक्सलवाद के खूनी दंश से मुक्त कराकर आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया गया है, उसने देश की माताओं-बहनों को एक सुरक्षित भविष्य और भयमुक्त वातावरण दिया है. पारंपरिक सोहर की मंगल-ध्वनि के बीच देश की सुरक्षा के लिए धन्यवाद का यह संदेश उपस्थित जनसमूह की आंखों में गर्व के आंसू ले आया.

इस पूरे महा-आयोजन के मुख्य संयोजक और पहल के प्रणेता मनीष मिश्रा भावुक नजर आए. उन्होंने इस ऐतिहासिक सफलता को बस्ती की समस्त मातृशक्ति के चरणों में समर्पित करते हुए कहा कि यह भगीरथ प्रयास केवल एक रिकॉर्ड की संख्या छूने के लिए नहीं था. यह हमारी उस लोक संस्कृति को सहेजने की जिद थी, जो आधुनिकता के शोर में कहीं पीछे छूट रही थी. हमारी माताओं-बहनों ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय संस्कृति की जड़ें आज भी उतनी ही गहरी और जीवंत हैं.

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पारंपरिक सोहर गायन कर रचा इतिहास

2500 महिलाओं का एक साथ सोहर गाना साक्षात ईश्वरीय चेतना का अहसास था. बस्ती ने दुनिया को दिखा दिया कि हमारे गांवों की परंपराएं विश्व स्तर पर नेतृत्व कर सकती हैं. भारतीय समाज में सोहर केवल एक लोकगीत नहीं, बल्कि जीवन के सृजन, बच्चे के जन्म और लोक-कल्याण का एक ऐसा मांगलिक गान है जो हमारे संस्कारों को दर्शाता है.

अमूमन घरों के आंगन तक सीमित रहने वाले इस सोहर को जब मनीष मिश्रा ने 2500 महिलाओं के सामूहिक कंठों के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंच दिया, तो यह एक वैश्विक सांस्कृतिक आंदोलन बन गया. कार्यक्रम स्थल पर केसरिया और पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं का अनुशासन और उनकी सुरीली तान देखकर गिनीज बुक के विशेषज्ञ भी हैरान रह गए.

इस वैश्विक उपलब्धि के बाद बस्ती जिले सहित पूरे उत्तर प्रदेश में हर्ष का माहौल है. सामाजिक विचारकों, सांस्कृतिक मनीषियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने मनीष मिश्रा की इस भगीरथ पहल की मुक्तकंठ से सराहना की है. जानकारों का कहना है कि इस एक रिकॉर्ड ने उत्तर प्रदेश की लोक विधाओं और ग्रामीण कलाकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं. बस्ती ने आज इतिहास बदला भी है और नया इतिहास रचा भी है.

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Author : सतीश श्रीवास्तव

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