'ईद' इस्लाम का सबसे बड़ा त्योहार होता है, जिसे रमजान खत्म होने के बाद शव्वाल महीने की पहली तारीख को मनाया जाता है. इसे मीठी ईद, ईद-उल-फितर और ईद-अल-फितर जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है.
लेकिन कई लोग इस भ्रम में रहते हैं कि, शव्वाल महीने की ईद को ही ईद कहा जाता है और इस्लाम में सिर्फ यही एक ईद मनाई जाती है. लेकिन ऐसा नहीं है. इस्लाम धर्म में मुख्य रूप से दो ईद का जिक्र मिलता है.
ईद-उल-फितर के 70वें दिन बाद भी ईद मनाई जाती है, जिसे ईद-उल-अजहा कहा जाता है. इसे बड़ी ईद या बकरीद भी कहा जाता है, जोकि इस्लामिक चंद्र कैलेंडर के अनुसार जिल-हिज्जा में हज यात्रा के समाप का प्रतीक है.
साधारण बोलचाल में लोग दोनों त्योहार को 'ईद' का नाम दे देते हैं, लेकिन दोनों त्योहारों को मनाने का तरीका और इनके महत्व में अंतर होता है. ईद-उल-फितर खुशी, उत्साह और प्रेम का प्रतीक है. तो वहीं ईद-उल-अजहा मुख्य रूप से कुर्बानी का त्योहार है.
इसके अलावा कई लोग ईद-ए-मिलाद-उन-नबी (Eid-e-Milad-un-Nabi) को भी तीसरी ईद मानते हैं. लेकिन यह पैगंबर मुहम्मद का जन्मदिन है और इसे मुख्य रूप से केवल जश्न का दिन माना जाता है.
पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इस्लाम मे मुख्य रूप से दो ईद 'ईद-उल-फितर' और 'ईद-उल-अजहा' निर्धारित किए थे.

