Green Sanvi: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते जोखिमों के बीच भारत ने एक बड़ी लॉजिस्टिक और कूटनीतिक उपलब्धि हासिल की है. एलपीजी टैंकर ग्रीन सान्वी ने 3 अप्रैल को सफलतापूर्वक होर्मुज को पार कर लिया है.
इसी बीच आइए जानते हैं कि यह टैंकर कितना पुराना है और इसका मालिक कौन है.
कौन है ग्रीन सान्वी का मालिक?
ग्रीन सान्वी का स्वामित्व MOL (India) Private Limited के पास है. यह कंपनी जापान की Mitsui O.S.K. Lines के तहत काम करती है.
जहाज की उम्र
यह टैंकर लगभग 17 साल पुराना है. इसका निर्माण 2009 में हुआ था. इसे दक्षिण कोरिया के उल्सान में स्थित प्रसिद्ध Hyundai Heavy Industries शिपयार्ड में बनाया गया था. यह दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे एडवांस्ड जहाज निर्माण सुविधाओं में से एक है. अपनी उम्र के बावजूद ग्रीन सान्वी जैसे जहाजों को लंबे समय तक चलने के लिए डिजाइन किया जाता है.
ग्रीन सान्वी किस तरह का जहाज है?
ग्रीन सान्वी वेरी लार्ज गैस कैरियर की कैटेगरी में आता है. यह एक ऐसी कैटेगरी होती है जिसे खास तौर से लंबी दूरी तक एलपीजी के परिवहन के लिए डिजाइन किया गया है. इस टैंकर की कुल क्षमता करीब 50,000 टन की है. वर्तमान में यह भारत के लिए लगभग 46,655 मीट्रिक टन एलपीजी ला रहा है.
आकार और संरचना
यह जहाज से काफी बड़ा है. इसकी लंबाई लगभग 225 मीटर है. आसान शब्दों में कहें तो अगर इसे सीधा खड़ा कर दिया जाए तो यह दिल्ली के कुतुब मीनार की ऊंचाई के तीन गुना से भी ज्यादा है. इसकी चौड़ाई लगभग 36 मीटर है. जब यह पूरी तरह से भरा होता है तो यह पानी में लगभग 11 से 12 मीटर तक डूब जाता है. ग्रीन सान्वी का इस मार्ग को पार करना खास तौर पर काफी महत्वपूर्ण है. यह सातवां भारतीय एलपीजी टैंकर है जिसने मौजूद तनावों के बीच होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित पार किया है. सरकार का कहना है कि देश में तेल और गैस की कोई कमी नहीं है. इसी के साथ सरकार ने लोगों को किसी भी तरह की अफवाह पर भरोसा करने से मना किया है. साथ ही सरकार ने लोगों को पाइप्ड नेचुरल गैस पर भी शिफ्ट होने के लिए कहा है. भारत अपनी आधी से ज्यादा गैस की जरूरत को इंपोर्ट से पूरी करता है और इसका एक बड़ा हिस्सा होर्मुज के रास्ते से ही भारत पहुंचता है.

